Bihar Police: कुख्यात या खाकी का खासमखास? पुलिस अभिरक्षा में अपराधी को वीआईपी ट्रीटमेंट, मोबाइल पर बात करता दिखा शूटर, वीडियो वायरल
Bihar Police: जिस अपराधी को वरीय पुलिस पदाधिकारी कुख्यात शूटर करार देते हैं, वहीं अपराधी कुछ ही देर बाद पुलिस अभिरक्षा में मोबाइल पर बतियाता नजर आ रहा है...
Bihar Police: बिहार में अपराध के खिलाफ सख़्ती के बड़े-बड़े दावों के बीच पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर संदेह के कटघरे में खड़ी नजर आ रही है। एक ओर वरीय पुलिस पदाधिकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जिस आरोपी को कुख्यात अपराधी, हत्याकांड का मुख्य शूटर बताते हैं, वहीं दूसरी ओर वही अपराधी पुलिस अभिरक्षा में वीआईपी सुविधा का मज़ा लेते हुए दिखाई दे रहा है। मामला सामने आते ही वर्दी की साख और सिस्टम की नीयत पर सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल, हत्याकांड के एक आरोपी को लेकर वरीय पुलिस अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उसे खूंखार और शातिर अपराधी करार दिया था। प्रेस वार्ता खत्म होते ही आरोपी को सदर थाने की पुलिस अपनी अभिरक्षा में लेकर कोर्ट परिसर पहुंची। इसी दौरान आरोपी मोबाइल फोन पर बेखौफ बातचीत करता हुआ नजर आया। किसी ने इस पल को कैमरे में कैद कर लिया और अब वह तस्वीर सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रही है।
हालांकि वायरल तस्वीर की आधिकारिक पुष्टि News4Nation नहीं करता, लेकिन सूत्रों का दावा है कि यह तस्वीर मुजफ्फरपुर कोर्ट परिसर की है। बताया जा रहा है कि बीते वर्ष सदर थाना क्षेत्र में हुए एक हत्याकांड में इस अभियुक्त की गिरफ्तारी हुई थी। गिरफ्तारी के बाद वरीय पुलिस अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे बड़ी कामयाबी बताया और आरोपी को मुख्य शूटर बताया गया था।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस अभिरक्षा में मोबाइल फोन कैसे पहुंचा? क्या यह महज़ लापरवाही है या फिर जानबूझकर दी गई सहूलियत? नियम साफ कहते हैं कि पुलिस हिरासत में किसी भी आरोपी को मोबाइल जैसी सुविधा देना सख्त मना है, खासकर तब जब वह आरोपी गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल हो।
इस वायरल तस्वीर ने पुलिस की कार्यशैली पर कई संगीन सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं, दूसरी तरफ उन्हीं के अधीन पुलिस महकमे पर कुख्यात अपराधियों को वीआईपी ट्रीटमेंट देने के आरोप लग रहे हैं।
अब देखना यह है कि क्या इस मामले में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा। सवाल सिर्फ एक आरोपी के मोबाइल का नहीं, बल्कि कानून, वर्दी और इंसाफ़ की साख का है।
रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा