NEET री-एग्जाम में डमी गैंग का बड़ा खुलासा, मेडिकल छात्र पर मास्टरमाइंड होने का आरोप, बायोमेट्रिक से कथित छेड़छाड़ कर रची गई साजिश
NEET Scam:नीट यूजी पुनर्परीक्षा में सामने आए कथित फर्जीवाड़े की जांच में एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं।...
NEET Scam:नीट यूजी पुनर्परीक्षा में सामने आए कथित फर्जीवाड़े की जांच में एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि पावापुरी स्थित बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (बिम्स) के एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष के छात्र रवि उर्फ रविशंकर उर्फ सम्राट सिंह ने बायोमेट्रिक सत्यापन एजेंसी से कथित मिलीभगत कर डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा दिलाने का पूरा रैकेट खड़ा किया। हालांकि, मामले की जांच जारी है और आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।
जांच के अनुसार, रविशंकर ने बिहार ही नहीं बल्कि झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली के मेडिकल छात्रों को कथित तौर पर मोटी रकम का लालच देकर डमी अभ्यर्थी के रूप में परीक्षा में बैठाने की योजना बनाई थी। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस कथित नेटवर्क को खड़ा करने में पावापुरी मेडिकल कॉलेज के छात्र रंजीत कुमार और गया के एएनएमसीएच के छात्र अर्पित सिंह ने भी उसकी मदद की। पुलिस के मुताबिक रविशंकर, प्रमोद यादव और रंजीत कुमार फिलहाल फरार हैं और उनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
जांच में बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताओं का आरोप सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, बायोमेट्रिक एजेंसी के संचालक प्रमोद यादव ने कथित तौर पर एक मेडिकल छात्र को सत्यापन कर्मी के रूप में तैनात किया। आरोप है कि जिन अभ्यर्थियों के फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं हुआ, उन्हें भी परीक्षा केंद्र में प्रवेश दे दिया गया। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी सेंध माना जाएगा।इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब लखीसराय के केंद्रीय विद्यालय, खगौर परीक्षा केंद्र पर झारखंड निवासी पूनम कुमारी को दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देते हुए पकड़ा गया। पूछताछ में उसने कथित तौर पर रविशंकर और अन्य लोगों के नाम बताए, जिसके बाद जांच एजेंसियों ने छह अन्य संदिग्ध डमी अभ्यर्थियों की पहचान की।
इसी तरह उच्च विद्यालय, हसनपुर केंद्र पर नगरनौसा के अभ्यर्थी की जगह परीक्षा दे रहे मधेपुरा निवासी मंतोष कुमार को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसे रविशंकर और रंजीत कुमार ने परीक्षा में बैठने के लिए तैयार किया था। वहीं केआरके उच्च विद्यालय, लखीसराय केंद्र से पकड़े गए विवेक कुमार ने भी जांच एजेंसियों को बताया कि उसे कथित रूप से मोटी रकम का लालच देकर परीक्षा में बैठाया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, तीनों परीक्षा केंद्रों के केंद्राधीक्षकों ने भी अपने बयानों में रविशंकर उर्फ सम्राट सिंह को कथित मुख्य साजिशकर्ता बताया है। वहीं गिरफ्तार डमी अभ्यर्थियों ने भी पूछताछ में उसके नाम का उल्लेख किया है। इन बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस पूरे नेटवर्क की तफ्तीश में जुटी है। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस कथित गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा परीक्षा प्रक्रिया में किस स्तर तक मिलीभगत हुई। मामले की आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की अंतिम पुष्टि होगी।
रिपोर्ट- राज पाण्डेय