पटना में डिजिटल गिरफ्तारी का खौफनाक खेल, दिल्ली पुलिस-CBI का डर दिखाकर रिटायर्ड अफसर से लाखों की ठगी, ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर खुला राज

Patna Cyber Crime: राजधानी पटना में साइबर अपराधियों ने ठगी का ऐसा खौफनाक जाल बुना कि कंकड़बाग के एक सेवानिवृत्त अधिकारी अपनी जीवनभर की कमाई गंवा बैठे। ...

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पटना में डिजिटल गिरफ्तारी का खौफनाक खेल- फोटो : social Media

Patna Cyber Crime: राजधानी पटना में साइबर अपराधियों ने ठगी का ऐसा खौफनाक जाल बुना कि कंकड़बाग के एक सेवानिवृत्त अधिकारी अपनी जीवनभर की कमाई गंवा बैठे। ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस और सीबीआई का अधिकारी बताकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाया और कथित मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर 66.80 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने गिरफ्तारी, परिवार की बदनामी और कानूनी कार्रवाई का ऐसा डर पैदा किया कि पीड़ित उनकी हर बात मानते चले गए। हैरानी की बात यह है कि ठगी का पूरा खेल तब तक चलता रहा, जब तक पीड़ित ऑस्ट्रेलिया में रह रहे अपने बेटे के पास नहीं पहुंच गए। बेटे से घटना साझा करने के बाद उन्हें साइबर ठगी का एहसास हुआ। अब पटना साइबर थाना मामले की जांच में जुटा है।

फोन आया और शुरू हो गया डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक खेल

पीड़ित के मुताबिक, उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने अपना नाम राजेश प्रधान बताया और खुद को दिल्ली पुलिस का कर्मी बताया। इसके बाद कथित पुलिसकर्मी ने उनकी बात सुनील कुमार नाम के एक अन्य व्यक्ति से कराई, जिसे भी पुलिस अधिकारी बताया गया।इसके बाद ठगों ने ऐसा डरावना दावा किया, जिसने पीड़ित को मानसिक दबाव में डाल दिया। उनसे कहा गया कि दिल्ली के चांदनी चौक स्थित एक बैंक खाते से 6.80 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है और इस मामले में उनके खिलाफ जांच चल रही है। कथित तौर पर केस दिल्ली के बाराखंभा थाने में दर्ज बताया गया और सीबीआई की जांच का हवाला दिया गया।

कानूनी कार्रवाई के नाम पर लगातार डराए जाने के कारण पीड़ित घबरा गए। उन्हें लगा कि वे किसी गंभीर आपराधिक मामले में फंस गए हैं। इसी मनोवैज्ञानिक दबाव का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने उन्हें अपने जाल में फंसा लिया।

पूरे परिवार की गिरफ्तारी की धमकी, घर में कैद रहने का फरमान

ठगों ने पीड़ित को धमकाया कि यदि उन्होंने किसी को इस मामले की जानकारी दी या उनके निर्देशों का पालन नहीं किया, तो पूरे परिवार को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने और किसी अन्य व्यक्ति से बात नहीं करने की हिदायत भी दी गई।सीबीआई की कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे एक बॉन्ड लेटर तक लिखवा लिया गया। इस तरह कथित जांच के नाम पर पीड़ित को मानसिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया। डिजिटल अरेस्ट की इस कथित साजिश में ठगों ने वर्दी या वास्तविक गिरफ्तारी के बजाय फोन कॉल, फर्जी पहचान और कानूनी कार्रवाई के डर को हथियार बनाया।

RBI जांच का बहाना, RTGS से उड़ाए 66.80 लाख रुपये

जब पीड़ित पूरी तरह भयभीत हो गए, तब आरोपियों ने आरबीआई की जांच का हवाला देना शुरू किया। उन्हें बताया गया कि जांच पूरी होने तक रकम दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित करनी होगी और प्रक्रिया समाप्त होने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।आरोपियों के झांसे में आकर पीड़ित ने आरटीजीएस के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों में कुल 66.80 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने भरोसा दिलाया था कि यह रकम सुरक्षित रहेगी और जांच समाप्त होने के बाद उनके खाते में वापस आ जाएगी।लेकिन रकम भेजने के बाद न तो कथित जांच पूरी होने की कोई विश्वसनीय जानकारी मिली और न ही पैसे वापस आए। तब पीड़ित को अपने साथ धोखाधड़ी होने का संदेह हुआ। तब तक उनकी बड़ी रकम साइबर अपराधियों के कब्जे में जा चुकी थी।

ऑस्ट्रेलिया पहुंचे बेटे के पास, तब खुला ठगी का राज

रकम स्थानांतरित करने के बाद पीड़ित ऑस्ट्रेलिया में रह रहे अपने बड़े बेटे के पास चले गए। वहां उन्होंने जब बेटे को पूरी घटना बताई, तब उन्हें समझ आया कि वे साइबर अपराधियों के सुनियोजित जाल का शिकार हो चुके हैं।इसके बाद बेटे ने ऑस्ट्रेलिया से ही शुरुआती शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित की ओर से पटना साइबर थाने में भी लिखित शिकायत दी गई है। पुलिस अब मामले की छानबीन कर रही है और संदिग्ध बैंक खातों तथा कॉल डिटेल्स की पड़ताल की जा रही है।

सावधान! फोन पर गिरफ्तारी का डर दिखाना साइबर ठगी का हथकंडा

इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि साइबर अपराधी पुलिस, सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को डराने की कोशिश करते हैं। याद रखें, फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को डराकर घर में कैद रहने का आदेश देना और जांच के नाम पर बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाना गंभीर खतरे का संकेत है।किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें और जांच के नाम पर किसी खाते में रकम ट्रांसफर न करें। यदि ऐसी ठगी का शिकार हों, तो तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

फिलहाल पटना साइबर पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस गिरोह में कौन-कौन शामिल है और ठगी की रकम किन खातों में भेजी गई।

ब्यूरो रिपोर्ट