Shambhu Girls Hostel: पटना में नीट छात्रा की गुत्थी खोलेगा डीएनए, 18 से 21 वर्ष के बीच के हो सकते हैं असली दरिंदे, हॉस्टल संचालक का बेटा भी SIT के रडार पर

Shambhu Girls Hostel: पटना में नीट छात्रा के कपड़ों और अंडरगारमेंट्स पर स्पर्म के नमूने पाए गए हैं, जिनसे अनुमान लगाया गया कि आरोपी की उम्र 18 से 21 वर्ष के बीच हो सकती है।...

Patna NEET girl case DNA to unravel suspects aged 18
पटना में नीट छात्रा कांड में 18 से 21 वर्ष के बीच के हो सकते हैं असली दरिंदे- फोटो : social Media

Shambhu Girls Hostel: बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही 18 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। यह मामला केवल एक अपराध की कहानी नहीं, बल्कि इंसानियत के खिलाफ एक घिनौनी वारदात बन गया है। परिजनों के आरोप हैं कि बेटी के साथ रेप के बाद हत्या की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना पुलिस ने विशेष जांच टीम गठित की, जो अब वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों के सहारे अपराधी को बेनकाब करने में जुटी है।

एसआईटी ने अब तक कुल 25 संदिग्धों के ब्लड सैंपल लिए हैं, जिनका डीएनए मिलान घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और एफएसएल रिपोर्ट से कराया जाएगा। हॉस्टल संचालिका के बेटे आशु अग्रवाल और हॉस्टल मालिक मनीष रंजन के बेटे को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। साथ ही मृतका के करीबी दोस्तों और हॉस्टल परिसर से जुड़े अन्य युवाओं पर भी नजर रखी जा रही है।

फॉरेंसिक लैब के सूत्रों ने बताया कि मृतका के कपड़ों और अंडरगारमेंट्स पर स्पर्म के नमूने पाए गए हैं, जिनसे अनुमान लगाया गया कि आरोपी की उम्र 18 से 21 वर्ष के बीच हो सकती है। यह सुराग पुलिस के लिए बड़ा मोड़ साबित हुआ है, क्योंकि अब जांच का पूरा फोकस उन लोगों पर है जो छात्रा के संपर्क में थे।

एसआईटी के अधिकारी बता रहे हैं कि अब तक किसी एक नाम पर मुहर नहीं लगी है, लेकिन डीएनए प्रोफाइलिंग अपराधी का चेहरा उजागर कर सकती है। इसमें हॉस्टल में काम करने वाले सभी मेल कर्मचारी, कुछ करीबी परिचित और वे लोग शामिल हैं, जिन्होंने छात्रा को बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंचाया था।

बता दें डीएनए  टेस्ट एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जो किसी व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना  का सटीक विश्लेषण करती है। इसका प्रयोग आपराधिक जांच, आनुवंशिक बीमारियों का पता लगाने और पारिवारिक इतिहास  जानने समेत कई काम के लिए किया जाता है। यह  99.9 फीसदी से अधिक सटीक परिणाम देता है।

एफएसएल द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि मृतका के कपड़ों पर मानव स्पर्म के निशान हैं, जो माता-पिता के आरोपों को पुख्ता करते हैं। अब एसआईटी इन सब संदिग्धों के डीएनए से मिलान कर रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जल्द ही असली दरिंदा बेनकाब होगा और न्याय का सामना करना पड़ेगा।

पटना की यह घटना राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल खड़ा करती है। लेकिन SIT और FSL के वैज्ञानिक जांच के बाद अब उम्मीद जगी है कि अपराधी को छुपने का कोई मौका नहीं मिलेगा। इस केस की हर कड़ी अब डीएनए के जाल में फंसकर सच का सामना करने वाली है।