पटना के कुख्यात बाप-बेटा गिरोह को STF ने घेरा, बिहार-झारखंड में दहशत का पर्याय रहे डॉक्टर साहब का खेल खत्म, वीडियो जारी कर मांगी जान की भीख

Bihar crime: बिहार की अपराध की दुनिया में लंबे अरसे से आतंक का दूसरा नाम बने कुख्यात मनोज सिंह उर्फ़ डॉक्टर और उसके बेटे माणिक सिंह को आखिरकार STF ने बंगलुरू घेर लिया है। ...

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पटना के कुख्यात बाप-बेटा गिरोह को STF ने घेरा- फोटो : reporter

Bihar crime: बिहार की अपराध की दुनिया में लंबे अरसे से आतंक का दूसरा नाम बने कुख्यात मनोज सिंह उर्फ़ डॉक्टर  और उसके बेटे माणिक सिंह को आखिरकार STF ने बंगलुरू घेर लिया है। इधर हत्या, लूट, रंगदारी और गोलीबारी की वारदातों से बिहार ही नहीं, झारखंड और ओडिशा तक खौफ फैलाने वाला यह बाप-बेटा गिरोह पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। इनकी गिरफ्तारी कानून के लिए बड़ी कामयाबी और अपराधियों के लिए सख़्त संदेश माना जा रहा है।वहीं वीडियो जारी कर कुख्यात मनोज सिंह उर्फ़ डॉक्टर  और उसके बेटे माणिक सिंह  ने कहा कि हथियार बरामदगी के नाम पर उनका फर्जी एनकाउंटर हो सकता है। बाप बेटे ने वीडियो जारी कर कहा है कि उनके हाथ में हथकड़ी लगा कर उनको गिरफ्तार किया जाए। दोनों ने वीडियो जारी कर जान की भीख मांगी है।

पटना जिले के नौबतपुर का रहने वाला माणिक सिंह अपने पिता मनोज सिंह के साथ मिलकर गैंग ऑपरेट करता था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, दोनों पर पटना के खगौल, दानापुर, बिहटा, दुल्हिनबाजार, पालीगंज, शाहपुर, बिक्रम, नौबतपुर, बाढ़, रनियातालाब और पटना वेस्ट के कई थानों में हत्या, डकैती, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और गोलीबारी के करीब 40 से 50 संगीन मामले दर्ज हैं। इसके अलावा झारखंड के जमशेदपुर, रांची, हजारीबाग समेत अन्य शहरों में भी इनके काले कारनामों की फेहरिस्त लंबी है।

बताया जाता है कि माणिक पिछले पांच सालों से फरार चल रहा था। इससे पहले साल 2015 में बाप-बेटा को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जेल से छूटते ही दोनों फिर अंडरग्राउंड हो गए। गिरफ्तारी के डर से इन्होंने झारखंड में पनाह ले रखी थी, जबकि हाल ही में पटना पुलिस ने इनके गिरोह के आठ कुख्यातों को हथियारों के साथ दबोच कर शिकंजा कस दिया था।

माणिक सिंह का अपराधी इतिहास रोंगटे खड़े कर देने वाला है। महज 12 साल की उम्र में उसने हथियार उठा लिया था और खगौल में एक मार्बल कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद नाबालिग रहते हुए ही जमशेदपुर में कुख्यात रंजीत चौधरी के साथ मिलकर एक ठेकेदार को मौत के घाट उतार दिया। हाल ही में माणिक ने एक कंस्ट्रक्शन कंपनी से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी। रकम नहीं मिलने पर उसके गुर्गों ने साइट पर गोलीबारी और बमबाजी कर दहशत फैला दी। गिरोह वाट्सएप कॉल के जरिए कारोबारियों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलता था।

वहीं मनोज सिंह को अपराध की दुनिया में डॉक्टर साहब के नाम से जाना जाता है। 1988 में पिता रामायण सिंह की हत्या के बाद उसने बदले की आग में हथियार उठाया और 1989 में छोटेलाल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। पटना के चर्चित डॉक्टर रमेश चंद्रा अपहरण कांड में नाम आने के बाद वह सुर्खियों में आया और नौबतपुर अपराध का गढ़ बन गया।

करीब पांच साल पहले बिक्रम में दर्जनों हथियारों के साथ गिरफ्तार हुआ यह बाप-बेटा गिरोह बेल पर बाहर आते ही फिर वारदातों में जुट गया था। अब STF की कार्रवाई ने इनके काले साम्राज्य पर ताला जड़ने को तैयार है। कानून के शिकंजे में आने के बाद इस गिरोह से पूछताछ में कई बड़े खुलासों की उम्मीद जताई जा रही है।

रिपोर्ट-सुमित कुमार