Bihar Tander Scam: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में बड़ा न्यायिक झटका, दो IAS समेत तीन आरोपियों पर विशेष अदालत का संज्ञान, SVU की कार्रवाई से मची खलबली
Bihar Tander Scam:विशेष निगरानी इकाई की जांच के आधार पर विशेष न्यायाधीश, निगरानी न्यायालय, पटना ने मामले में प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर तीन आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेते हुए आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।
Bihar Tander Scam: बिहार के बहुचर्चित सरकारी टेंडर और भ्रष्टाचार मामले में अब जांच की आंच अदालत तक पहुंच गई है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) की जांच के आधार पर विशेष न्यायाधीश, निगरानी न्यायालय, पटना ने मामले में प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर तीन आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेते हुए आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
मामले में बिहार सरकार के पूर्व संयुक्त सचिव योगेश कुमार सागर, तत्कालीन अपर सचिव अभिलाषा कुमारी शर्मा तथा मैट्रिस्वा इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पवन कुमार को आरोपी बनाया गया है।विशेष निगरानी इकाई के अपर पुलिस महानिदेशक पंकज कुमार दाराद ने बताया कि विशेष निगरानी इकाई ने ठेकेदार रिशुश्री से जुड़े कथित भ्रष्टाचार, सरकारी निविदाओं में हेरफेर और सरकारी गोपनीय दस्तावेजों के दुरुपयोग के आरोपों के आधार पर कांड संख्या 05/2025 दर्ज किया था।
विशेष निगरानी इकाई के अपर पुलिस महानिदेशक पंकज कुमार दाराद ने बताया कि आरोप है कि सरकारी ठेकों और निविदाओं में कथित रूप से नियमों को प्रभावित कर रिशुश्री और उससे जुड़ी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। जांच एजेंसी के अनुसार इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
विशेष अदालत के आदेश के बाद आरोपियों के ठिकानों पर तलाशी और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। अदालत ने आरोपियों को निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। हालांकि, न्यायिक सिद्धांतों के अनुसार किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने तक निर्दोष माना जाता है।
इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि जांच की जद में राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी आए हैं। विपक्ष इसे सरकार की कार्यशैली और प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़कर सवाल उठा सकता है, जबकि सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
इस कार्रवाई को सरकारी तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही लड़ाई के एक अहम पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। यदि जांच और सुनवाई के दौरान आरोप साबित होते हैं तो यह बिहार के प्रशासनिक इतिहास के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में शामिल हो सकता है। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो संबंधित अधिकारियों को कानूनी राहत मिलने का रास्ता भी खुला रहेगा। फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन, राजनीति और न्यायिक जगत की पैनी नजर बनी हुई है।
रिपोर्ट- रंजीत कुमार