Bihar News: इंजीनियर से मारपीट के बाद बिजली विभाग का बदला, पूरे गांव की काटी बिजली, दो दिन से अंधेरे में डूबा है इलाका, नल-जल योजना भी ठप, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

Bihar News: विद्युत बोर्ड के एक कनिष्ठ अभियंता के साथ हुई मारपीट के बाद शनिवार की अलसुबह से ही पूरे गांव की बिजली आपूर्ति काट दी गई, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

Sasaram After Engineer Assault Power Cut to Entire Village A
बिजली विभाग ने पूरे गांव को दी अंधेरे की सज़ा- फोटो : reporter

Bihar News:  रोहतास ज़िले के शिवसागर थाना क्षेत्र स्थित जिगना गांव इन दिनों अंधेरे की कैद में जीने को मजबूर है। वजह विद्युत बोर्ड के एक कनिष्ठ अभियंता के साथ हुई मारपीट, जिसकी सज़ा पूरे गांव को दे दी गई। शनिवार की अलसुबह से ही पूरे गांव की बिजली आपूर्ति काट दी गई, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सवाल यह उठ रहा है कि कसूर किसी का, सज़ा सबको क्या यही इंसाफ़ है?

बिजली गुल होते ही सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना भी दम तोड़ गई। नल सूखे पड़े हैं, लोग पीने के पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। शाम ढलते ही गांव अंधेरे में डूब जाता है बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं का रसोई काम और आम ज़िंदगी सब पर ग्रहण लग गया है। मोबाइल चार्ज तक करना चुनौती बन गया है।

ग्रामीणों का ग़ुस्सा लाज़िमी है। उनका कहना है कि गांव के एक व्यक्ति का अपराध पूरे गांव पर थोपना तानाशाही फरमान जैसा है। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज सिंह का कहना है कि गांव के अधिकांश घरों में वैध बिजली कनेक्शन है और जिस व्यक्ति के साथ मारपीट हुई, उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। इसके बावजूद पूरे गांव की बिजली काट देना न सिर्फ़ अविवेकपूर्ण, बल्कि सरकारी निर्देशों के भी खिलाफ़ है।

दूसरी ओर, विद्युत बोर्ड का पक्ष भी कम गंभीर नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ असामाजिक तत्वों ने जेई और अन्य कर्मियों पर जानलेवा हमला किया। कनीय अभियंता विजय शंकर के सिर और आंख में गंभीर चोटें आई हैं, जबकि जितेंद्र समेत दो लाइनमैन भी घायल हुए हैं। बताया गया कि आटा चक्की मिल के औचक निरीक्षण के दौरान यह हमला हुआ। सभी घायलों का इलाज सासाराम सदर अस्पताल में चल रहा है और वे खतरे से बाहर हैं।

प्रशासन ने भी पूरे गांव की बिजली काटने को ग़लत ठहराया है। अनुमंडलीय पदाधिकारी डॉ. नेहा कुमारी ने साफ कहा कि मारपीट के मामले में प्राथमिकी दर्ज है और यदि गांव की लाइन काटी गई है, तो जल्द बहाल कराई जाएगी।अब बड़ा सवाल यही है क्या प्रशासन अपराध और व्यवस्था के बीच संतुलन बना पाएगा, या जिगना गांव यूं ही अंधेरे में इंसाफ़ का इंतज़ार करता रहेगा?

रिपोर्ट- रंजन सिंह