Siwan Encounter: पुलिस ने चोरों को छोड़ा! बहनों के पैर में ठोक दी सटीक गोलियाँ, सीवान में एनकाउंटर पर पुलिस पर उठ रहे सवाल,जानिए पूरा मामला
Siwan Encounter: सीवान के खोड़ीपाकड़ गाँव में शुक्रवार की सुबह पुलिस ने जो "एनकाउंटर" दिखाया, वो दरअसल एक ठगी का नंगा नाच था!...
Siwan Encounter: सीवान के खोड़ीपाकड़ गाँव में शुक्रवार की सुबह पुलिस ने जो "एनकाउंटर" दिखाया, वो दरअसल एक ठगी का नंगा नाच था। दो मासूम बहनें 18 साल की अंजू कुमारी और नीतू कुमारी घर के दरवाजे पर खड़ी थीं, तभी पुलिस की अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई।
दोनों के पैरों में सटीक गोली लगी –ठीक वैसे ही, जैसे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट "अपराधी" के पैर में मारते हैं ताकि भाग न सके। फर्क बस इतना कि इस बार "अपराधी" दो निर्दोष बहनें थीं।रात दो बजे ट्रक के पास कुछ बदमाश पहिया खोल रहे थे। भाई ने देखा, पड़ोस की दुकान वाले को फोन किया, उसने पुलिस को खबर दी। पुलिस आई, लेकिन जैसे ही बदमाशों ने फरार होने की कोशिश की, पुलिस ने गोलियाँ बरसानी शुरू कर दीं। चोर तो कट गए, लेकिन गोलियाँ सीधी वकील पंडित की बेटियों पर लगीं। घर के दरवाजे पर खड़ी अंजू और नीतू को पैरों में गोली मारी गई।
ग्रामीण चिल्लाए, "चोर भाग गए थे, फिर फायरिंग क्यों?" लेकिन पुलिस के कान में जूं तक नहीं रेंगी।घायल बहनों की माँ का गुस्सा फूट पड़ा "कुछ दिन पहले भी चोरी हुई थी, तब भी पुलिस ने हमें ही बदसलूकी की। इस बार खुद बुलाया, तो हम पर ही गोलियाँ चला दीं। क्या हम चोर हैं?"
ग्रामीणों का एक ही सवाल "पुलिस ने चोरों को देखते ही क्यों फायरिंग शुरू कर दी, जब वो पहले ही मौके से फूट चुके थे?" घटनास्थल से बरामद गोली के खोखे और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान बता रहे हैं कि ये कोई क्रॉस-फायरिंग नहीं, बल्कि जानबूझकर निशाना बनाकर चलाई गई गोलियाँ थीं।थाना प्रभारी आशुतोष कुमार सिंह का पुराना राग "चोरों ने फायरिंग की, जवाब में पुलिस ने चलाई। गोली किसकी लगी, ये साफ नहीं।" लेकिन सवाल ये है कि चोर भाग चुके थे तो फायरिंग का क्या मतलब? और अगर जवाबी फायरिंग थी तो पैरों में सटीक क्यों लगी? ग्रामीण चिल्ला रहे हैं – "ये एनकाउंटर नहीं, पुलिस का कत्लेआम है।"अब सीवान की गलियों में एक ही आवाज़ गूंज रही है "पुलिस अगर चोरों को छोड़कर मासूमों पर गोलियाँ चलाएगी, तो फिर 'सुरक्षा' का मतलब क्या बचा? ये एनकाउंटर नहीं, बल्कि 'एनकाउंटर विद बैकग्राउंड' है जिसमें निर्दोष बहनों के पैर पुलिस की निशानेबाजी का शिकार बने।"