बिहार में कानून का निकला जनाजा! शराब के नशे में चूर दरोगा ने कर दिया फायर, मदद करने आए आर्मी जवान पर की गोलियों की बरसात, वर्दी हुई शर्मसार
Bihar Crime: बिहार में शराबबंदी की हिफाज़त का जिम्मा जिन कंधों पर है, अगर वही कंधे नशे के बोझ तले लड़खड़ाने लगें तो फिर कानून का जनाज़ा निकलना तय है।
Bihar Crime: बिहार में शराबबंदी की हिफाज़त का जिम्मा जिन कंधों पर है, अगर वही कंधे नशे के बोझ तले लड़खड़ाने लगें तो फिर कानून का जनाज़ा निकलना तय है। हाजीपुर-मुजफ्फरपुर एनएच-22 पर घटी एक सनसनीखेज वारदात ने न सिर्फ पुलिस महकमे की साख पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि शराबबंदी के दावों की भी परतें उधेड़ दी हैं। आरोप है कि शराब के नशे में धुत एक दरोगा ने मदद करने आए आर्मी जवान पर ही गोली चला दी। गनीमत रही कि जवान की जान बच गई, हालांकि बारूद के छींटे लगने से उसकी आंख घायल हो गई।
घटना भगवानपुर थाना क्षेत्र के बांथू गांव के पास अहले सुबह की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, पुलिस का स्टिकर लगी एक कार सड़क किनारे दुर्घटनाग्रस्त होकर फंस गई। कार में सवार व्यक्ति ने पास के एक घर का दरवाजा खटखटाकर मदद मांगी। इंसानियत दिखाते हुए ग्रामीणों ने सहायता की, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने सबको हैरत में डाल दिया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मदद मांगने वाला व्यक्ति खुद को दरोगा बताते हुए वर्दी का रौब झाड़ने लगा। नशे में चूर होकर उसने कथित तौर पर गाली-गलौज शुरू कर दी। जब घर में मौजूद आर्मी जवान रजनीश ने इसका विरोध किया, तो आरोप है कि दरोगा ने बेहद करीब से सर्विस रिवॉल्वर निकालकर फायर झोंक दिया। गोली जवान को नहीं लगी, लेकिन बारूद के प्रभाव से उसकी आंख जख्मी हो गई। कुछ इंच का फर्क एक बड़े मातम को टाल गया।
सूचना मिलते ही भगवानपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया। मौके से उसकी सर्विस रिवॉल्वर और कथित तौर पर शराब की एक बोतल भी बरामद की गई है। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है। हालांकि पुलिस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी की पहचान दीपक कुमार के रूप में हुई है, जो कथित तौर पर फारबिसगंज में पदस्थापित बताए जा रहे हैं।
यह घटना कई असहज सवाल छोड़ गई है। जिस राज्य में आम नागरिक को शराब की एक बूंद रखने पर जेल भेजने का दावा किया जाता है, वहीं अगर कानून लागू कराने वाला ही नशे में हथियार लहराता मिले, तो जनता आखिर किस पर भरोसा करे? शराबबंदी का पहरेदार अगर खुद जाम का हिमायती बन जाए, तो कानून किताबों में और नैतिकता भाषणों में ही रह जाती है।फिलहाल जांच जारी है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि मेडिकल जांच में क्या सामने आता है और आरोपी पर कौन-कौन सी धाराओं में कार्रवाई होती है। लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने वर्दी की गरिमा, शराबबंदी की साख और पुलिस जवाबदेही तीनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
रिपोर्ट- ऋषभ कुमार