Bihar Crime: बिहार में फिर हुई इंसानियत शर्मसार, सड़क पर फेंका गया नवजात का शव, दो दिन में दूसरी वारदात, नर्सिंग होम-सिस्टम पर उठे संगीन सवाल
Bihar Crime: बिहार में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब सड़क किनारे फिर नवजात शिशु का शव पड़ा मिला।....
Bihar Crime: बिहार में गुरुवार की सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब सड़क किनारे नवजात शिशु का शव पड़ा मिला। जैसे ही यह खबर फैली, राहगीरों और स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर उमड़ पड़ी। मासूम के बेजान शरीर ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। महज दो दिनों के भीतर दूसरी बार नवजात का शव मिलने से शहर में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
स्थानीय लोगों ने तुरंत वैशाली नगर थाना पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। फिलहाल नगर थाना पुलिस कागजी कार्रवाई और मामले की जांच में जुटी हुई है। लेकिन सवाल यह है कि एक के बाद एक नवजात के शव सड़कों पर कैसे मिल रहे हैं?
लोगों का आरोप है कि हाजीपुर के कई निजी नर्सिंग होम में अवैध गतिविधियां धड़ल्ले से चल रही हैं। चर्चा है कि स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की मिलीभगत से गैरकानूनी प्रसव और फिर सबूत मिटाने के लिए नवजात के शव ठिकाने लगाए जा रहे हैं। पोखरा मुहल्ला के लोगों का दावा है कि आसपास मौजूद नर्सिंग होम से ही शव को सड़क पर फेंका गया है।
बता दें इससे पहले 6 जनवरी को नगर थाना क्षेत्र से महज 250 मीटर की दूरी पर, कोऑपरेटिव बैंक के पास कचरे के ढेर से भी एक नवजात का शव बरामद हुआ था। उस वक्त भी लोगों की भीड़ जुटी थी और नगर परिषद के सफाई कर्मी शव को अपने साथ ले गए थे। दो घटनाओं के बीच की नजदीकी और समय का अंतराल अब इसे इत्तेफाक नहीं, बल्कि किसी संगठित गुनाह की ओर इशारा कर रहा है।
शहर में तरह-तरह की चर्चाएं गर्म हैं। कुछ लोग इसे प्रेम प्रसंग और अवैध संबंधों से जोड़कर देख रहे हैं जहां लोकलाज के डर से अविवाहित मां नवजात को जन्म देकर सड़क पर फेंक देती है। लोगों का कहना है कि जिसने नौ महीने तक कोख में रखा, उसी मां ने जन्म के बाद मासूम को मौत के हवाले कर दिया। यह सोच ही रूह कंपा देने वाली है।
नवजात के शव को देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। सवाल यह नहीं कि बच्चा किसका था, सवाल यह है कि कानून, समाज और सिस्टम कहां था, जो इस मासूम को बचा नहीं सका? अब निगाहें पुलिस और प्रशासन पर हैं क्या इस नरसंहार के पीछे छिपे चेहरे बेनकाब होंगे या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?
रिपोर्ट- ऋषभ कुमार