महिला आरक्षण की राह में बड़ा अड़ंगा, INDIA गठबंधन के साथ NDA का देने वाले वाली इस पार्टी ने भी फंसा दिया पेच
New Delhi : संसद में पेश होने होने जा रहे महिला आरक्षण संशोधन विधयेक को लेकर हंगामा होना तय है। सरकार को इसे पास कराने में बड़ी मशक्कत करनी होगी। जहां विपक्ष ने इसके विरोध का एलान किया है, वहीं एनडीए के समर्थक एक दल ने भी इसमे पेंच फंसा दिया है...
New Delhi : लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मूर्त रूप देने के लिए कल गुरुवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाना है, जिसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक तथा इनसे संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है। हालांकि इस विधेयक के पास होने में बड़ा अड़ंगा लगता नजर आ रहा है। विपक्ष इंडिया गठबंधन के साथ-साथ हमेशा एनडीए का साथ देने वाली बीजू जनता दल ने इसमें पेंच फंसा दिया है।
कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्षी गठबंधन INDI अलायंस ने महिला आरक्षण के लिए संसद में आने वाले संशोधन बिल का विरोध करेगा। आज बुधवार को गठबंधन के नेताओं की नई दिल्ली में हुई एक बैठक के बाद यह फैसला लिया। मल्लिकार्जुन खरगे ने यह बैठक अपने आवास '10 राजाजी मार्ग' पर दोपहर तीन बजे बुलाई थी।
बैठक के बाद खरगे ने कहा, "हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विधेयक लाने के सरकार के तरीके का विरोध करते हैं, जो राजनीति से प्रेरित है।" उन्होंने आगे कहा, “हम एकजुट हैं, हमने परिसीमन संबंधी विधेयक का विरोध करने का फैसला किया है।” इससे पहले विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने खरगे के आवास पर महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर साझा रणनीति को लेकर चर्चा की।
वहीं अकसर संसद में सभी बिलों पर भाजपा की अगुवाई वालेएनडीएका समर्थन करने वाले बीजू जनता दल (BJD) सुप्रीमो नवीन पटनायक ने इस बार पेच फंसा दिया है। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल के प्रमुख नवीन पटनायक ने बुधवार को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर परिसीमन बिल और महिला आरक्षण बिल का स्वागत तो किया लेकिन उनके सामने कुछ शर्तें रख दी हैं।
नवीन पटनायक ने लिखा, “हम परिसीमन बिल का स्वागत तभी करेंगे, जब ओडिशा के राजनीतिक अधिकार सुरक्षित रहें। यह सिर्फ़ संख्याओं का मुद्दा नहीं है। यह बिल सीधे तौर पर संविधान में निहित सहकारी संघवाद की भावना पर चोट करता है। राजनीतिक अधिकारों में किसी भी तरह की कमी से ओडिशा और वहाँ के लोगों की आकांक्षाएँ कमज़ोर होंगी। मैं ओडिशा के मुख्यमंत्री के रूप में आपसे अपील करता हूँ कि आप इस मुद्दे को मज़बूती से उठाएँ क्योंकि आपके पास ऐसा करने की नैतिक और वैध शक्ति है।”