ADR की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, चार सालों में 111 सांसदों और विधायकों ने बदला पाला, नागालैंड और बंगाल बने दल-बदल के सबसे बड़े केंद्र

ADR Report : पिछले चार सालों में देश के 111 माननीयों ने पाला बदला है. जिससे करीब 6 राज्यों में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. दल बदल के सबसे बड़े केंद्र नागालैंड और बंगाल बने हैं.......पढ़िए आगे

ADR की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, चार सालों में 111 सांसदों और
माननीयों ने बदला पाला - फोटो : SOCIAL MEDIA

New Delhi : देश की राजनीति में कई नेता किसी दल के टिकट पर चुनाव लड़ते है. विधानसभा और लोकसभा में जाते और कुछ दिनों के बाद ही दुसरे दल में शामिल हो जाते हैं. इस तरह पिछले चार वर्षों (2022 से 2026) के दौरान 111 सांसदों और विधायकों ने अपनी निष्ठा बदलते हुए दूसरी पार्टियों का दामन थाम लिया. एडीआर ने जारी किये अपने रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है. 

111 जनप्रतिनिधियों का पलायन और नागालैंड-बंगाल का प्रमुख योगदान

ADR के आंकड़ों के अनुसार, पाला बदलने वाले 111 नेताओं में 26 लोकसभा सांसद, 7 राज्यसभा सांसद और 78 विधायक शामिल हैं. रिपोर्ट से खुलासा होता है कि 78 विधायकों में से 70 ने चुनाव जीतते ही सीधे नई पार्टी ज्वाइन कर ली, जबकि 8 नेताओं ने अयोग्यता या इस्तीफे के बाद उपचुनाव के जरिए दोबारा जीत हासिल की. देश के 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दर्ज किए गए इन मामलों में अकेले नागालैंड (32 जनप्रतिनिधि) और पश्चिम बंगाल (20 जनप्रतिनिधि) की हिस्सेदारी लगभग 47 प्रतिशत रही.

सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों को लगा बड़ा झटका

इस राजनीतिक पलायन में सबसे बड़ा नुकसान नागालैंड की NDPP को पहुंचा, जिसके 25 निर्वाचित प्रतिनिधियों (कुल दल-बदल का 23%) ने पार्टी का साथ छोड़ दिया. इसके अलावा ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के 20 और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के 19 जनप्रतिनिधियों ने भी पाला बदला. इन तीनों प्रमुख दलों को मिलाकर कुल 64 नेताओं ने पार्टी छोड़ी, जो कुल दल-बदल के मामलों का 58 प्रतिशत है. इनके अलावा BRS के 9, AAP व NCP के 7-7, शिवसेना (UBT) के 6 और JD(U) के 5 नेताओं ने भी पाला बदला.

NPF, BJP और NCPI रहे दल-बदल के सबसे बड़े लाभार्थी

पार्टी बदलने वाले नेताओं की पहली पसंद नेशनल पीपुल्स फ्रंट (NPF) रही, जिसमें सबसे ज्यादा 32 जनप्रतिनिधि शामिल हुए. इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में 29 और नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में 20 नेता पहुंचे. आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि NPF, BJP और NCPI ने मिलकर कुल 111 में से 81 नेताओं (लगभग 73 प्रतिशत) को अपने पाले में करने में सफलता हासिल की. वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस को 9, शिवसेना को 8, NPP को 6 और PPA को 4 नए नेता मिले.

राज्यों में सत्ता के समीकरणों पर पड़ा सीधा असर

प्रतिनिधियों के इस दल-बदल ने कई राज्यों में चुनावी जनादेश के मूल स्वरूप को बदलकर रख दिया. नागालैंड में 32 नेताओं के पाला बदलने से सत्ता का नया संतुलन कायम हुआ, वहीं पश्चिम बंगाल में 20 सांसदों के अलग होने से विपक्षी राजनीति की दिशा प्रभावित हुई. तेलंगाना में BRS के 9 विधायक कांग्रेस में शामिल हुए, जिससे विपक्षी खेमा कमजोर हुआ. इसी तरह गोवा में कांग्रेस के 8 विधायक और मणिपुर में JD(U) के 5 विधायक BJP में शामिल हो गए, जिससे सत्तारूढ़ दलों को मजबूती मिली.