जामिया मिलिया इस्लामिया में 'आरक्षण' का कत्ल? सांसद भीम सिंह ने संसद में खोली पोल—कहा, वंचितों के साथ हो रही मारपीट, जांच की मांग

संसद के बजट सत्र के दौरान बिहार से भाजपा सांसद डॉ. भीम सिंह ने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के कर्मचारियों के साथ हो रहे कथित भेदभाव का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया है।

जामिया मिलिया इस्लामिया में 'आरक्षण' का कत्ल? सांसद भीम सिंह

New Delhi - संसद के बजट सत्र के दौरान बिहार से राज्यसभा सांसद डॉ. भीम सिंह ने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में आरक्षण नीतियों के उल्लंघन और वंचित वर्गों के शोषण का गंभीर मामला उठाया है। 'विशेष उल्लेख' (Special Mention) के माध्यम से अपनी बात रखते हुए सांसद ने आरोप लगाया कि एक केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के बावजूद वहां SC, ST और OBC कर्मचारियों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच और विशेष ऑडिट की मांग की है।

राष्ट्रवादी नींव और वर्तमान स्थिति पर प्रहार 

सांसद डॉ. भीम सिंह ने कहा कि जामिया मिलिया इस्लामिया की नींव राष्ट्रवादी मौलाना अबुल कलाम आजाद और डॉ. जाकिर हुसैन ने राष्ट्रीय शिक्षा, सामाजिक समरसता और देश निर्माण के महान उद्देश्यों के साथ रखी थी। लेकिन आज अत्यंत खेद का विषय है कि एक केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के बावजूद वहां की छात्र संरचना और नियुक्तियों से वह समावेशी और 'बहुलतावादी छवि' पूरी तरह गायब हो चुकी है।

SC, ST और OBC कर्मचारियों की 'भयावह' स्थिति 

संसद में अपनी बात रखते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में कार्यरत वंचित वर्गों (SC, ST और OBC) की स्थिति सबसे अधिक भयावह है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन वर्गों के कर्मचारियों को न केवल उनके वैधानिक सेवा लाभों और संवैधानिक आरक्षण से वंचित रखा जा रहा है, बल्कि प्रशासन उनके हितों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।

परिसर में मारपीट और दुर्व्यवहार का गंभीर आरोप 

सांसद ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि वंचित वर्ग के कर्मचारियों के साथ परिसर के भीतर मारपीट और दुर्व्यवहार की घटनाएं भी हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इन शिकायतों पर प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और यह संस्था के भीतर एक असुरक्षित माहौल को दर्शाता है।

उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग संस्थान के 'समावेशी विजन' को बचाने के लिए डॉ. भीम सिंह ने भारत सरकार से मांग की है कि जामिया की आरक्षण नीति और विशेषकर वंचित वर्ग के कर्मचारियों के साथ हो रहे भेदभाव की तत्काल उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक कोई बाहरी जांच एजेंसी हस्तक्षेप नहीं करेगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी।

'विशेष ऑडिट' से खुलेगा नियुक्तियों का कच्चा चिट्ठा 

जांच के साथ-साथ सांसद ने विश्वविद्यालय की नियुक्तियों और फंड के इस्तेमाल को लेकर 'विशेष ऑडिट' (Special Audit) की भी मांग की है। उनका मानना है कि ऑडिट के जरिए यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियुक्तियों में आरक्षण के नियमों का पालन किया गया है या नहीं, और क्या सरकारी धन का उपयोग नियमों के विरुद्ध किसी विशेष विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए तो नहीं हो रहा।

हर भारतीय के समान अधिकार की वकालत 

अपने संबोधन के अंत में सांसद ने कहा कि यह लड़ाई किसी संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा की है। उन्होंने मांग की कि हर भारतीय को समान अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए, जो हमारा संविधान सुनिश्चित करता है। डॉ. भीम सिंह की इस मांग के बाद अब गेंद केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के पाले में है।