प्रियंका गांधी के महिला आरक्षण वाले बयान पर रवि शंकर का पलटवार, यह कैसी भाषा
Desk : बीते शुक्रवार को केन्द्र की एनडीए सरकार को बड़ा झटका लगा. केन्द्र की मोदी सरकार पहली बार संसद में पहली बार किसी बिल को पास करने में नाकाम रही. लोकसभा में लाया गया महिला आरक्षण से जुड़े तीनो बिल गिर गए. जिसके बाद विपक्ष द्वारा लगातार बयानबाजी का दौर जारी है. इसी कड़ी मे कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केन्द्र सरकार पर जमकर हमला बोली है.
प्रियंका गांधी ने कहा कि ये संविधान की जीत है. विपक्ष के एकता की जीत है. गृह मंत्री और पीएम ने अपने भाषण में कहा कि अगर आप इसके समर्थन में नहीं आए तो आप चुनाव में कभी नहीं जीत सकते. यह कहीं से सही नहीं है. देश की जनता अब 12 साल पहले वाली जनता नहीं है. वह सब समझती है.
प्रियंका गांधी ने महिला रिजर्वेशन बिल पर बीजेपी पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने सत्ता में स्थायी रूप से बने रहने के लिए महिलाओं को ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की और खुद को 'महिलाओं का मसीहा' साबित करना चाहा. प्रियंका गांधी ने हाथरस, मणिपुर और महिला खिलाड़ियों के मुद्दे उठाते हुए कहा कि सरकार का महिला सशक्तिकरण का दावा जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता.महिला रिजर्वेशन बिल पर बोलते हुए वायनाड सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि कल लोकतंत्र की बड़ी जीत हुई. संघीय ढांचे को कमजोर करने की सरकार की कोशिश को रोका गया.यह लोकतंत्र की जीत थी.प्रियंका गांधी ने कहा कि चुनावों के बीच जल्दबाजी में सत्र बुलाया गया, केवल एक दिन पहले मसौदा सामने आया,साजिश रची गई. स्थाई रूप से सत्ता में रहने के लिए महिलाओं की आड़ ली गई. सरकार महिलाओं का मसीहा बनने की कोशिश कर रही है.
इधर प्रियंका गांधी के इस बयान पर अब भाजपा के वरिष्ठ सांसद रविशंकर प्रसाद ने पलटवार किया है. रविशंकर प्रसाद ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि प्रियंका ये कौन सी भाषा बोल रही हैं कि महिलाओं का इस्तेमाल हो सकता है क्या? महिला कोई सामान हैं क्या? प्रियंका की ये भाषा ही गलत है.
सांसद रविशंकर प्रसाद ने महिला आरक्षण बिल के बहाने प्रियंका पर पलटवार करते हुए कहा कि सामान्यत: प्रियंका गांधी पर मैं कुछ नहीं बोलता हूं,लेकिन आज पहली बार टिप्पणी कर रहा हूं. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ये कौन सी भाषा है? महिलाओं का इस्तेमाल हो सकता है क्या? महिला कोई सामान है? ये कौन सी भाषा है? महिलाओं का इस्तेमाल हो सकता है क्या? महिला कोई सामान है? उसे कोई इस्तेमाल का विषय बताया जा रहा है. इसी सोच का नतीजा था कि यूपीए के समय बिल को फाड़ा गया था. कांग्रेस को न महिला पर भरोसा है और न संसद पर भरोसा है. पीड़ा की बात ये है कि दक्षिण भारत के लोग भी उनके झांसे में आए जो ठीक नहीं है.
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण बिल गिराने के बाद जश्न मनाया. कांग्रेस को संविधान में विश्वास नहीं है. कांग्रेस की मंशा सिर्फ दिखावे की है. कांग्रेस ने महिलाओं का हक छीना. कांग्रेस का क्रूर चेहरा सामने आ गया है. उन्होंने कहा कि बिल गिरने से देश की महिलाओं को नुकसान है.