Today Panchang: 4 अक्टूबर को मातृ नवमी, इन समयों में करें शुभ काम, जानें राहुकाल और चौघड़िया
Today Panchang: 4 अक्टूबर 2026 का पंचांग जानें। आज की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त, शुभ मुहूर्त, चौघड़िया, राहुकाल और सूर्य पूजा के उपाय की पूरी जानकारी यहां पढ़ें।
Today Panchang: आज 4 अक्टूबर 2026, रविवार को शक संवत 1948 और विक्रम संवत 2083 चल रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार आज आश्विन कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। आज सूर्य दक्षिणायन में हैं और शरद ऋतु चल रही है। दिन की शुरुआत पुनर्वसु नक्षत्र से होगी और देर रात के बाद पुष्य नक्षत्र शुरू होगा।
आज की तिथि और नक्षत्र
आश्विन कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि 5 अक्टूबर की सुबह 3 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी। पुनर्वसु नक्षत्र रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। इसके बाद पुष्य नक्षत्र शुरू होगा। आज परिघ योग दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसके बाद शिव योग शुरू होगा। तैतिल करण शाम 4 बजकर 51 मिनट तक रहेगा और इसके बाद गरज करण शुरू होगा।
चंद्रमा और सूर्य की स्थिति
आज चंद्रमा शाम 6 बजकर 31 मिनट तक मिथुन राशि में रहेगा। इसके बाद चंद्रमा कर्क राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य देव इस समय कन्या राशि में स्थित हैं। आज सूर्योदय सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 4 मिनट पर होगा। चंद्रोदय 5 अक्टूबर की रात 12 बजकर 40 मिनट पर होगा। चंद्रास्त दोपहर 1 बजकर 58 मिनट पर रहेगा।
आज के शुभ मुहूर्त
4 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। वहीं अमृत काल रात 9 बजकर 57 मिनट से रात 11 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। दिन के चौघड़िया की बात करें तो सुबह 6 बजकर 15 मिनट से 7 बजकर 44 मिनट तक उद्वेग चौघड़िया रहेगा। इसके बाद 7 बजकर 44 मिनट से 9 बजकर 13 मिनट तक चर चौघड़िया रहेगा। सुबह 9 बजकर 13 मिनट से 10 बजकर 41 मिनट तक लाभ चौघड़िया और 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक अमृत चौघड़िया रहेगा।
आज का राहुकाल और अशुभ समय
आज रविवार को राहुकाल शाम 5 बजकर 30 मिनट से शाम 7 बजे तक रहेगा। इस दौरान शुभ काम शुरू करने से बचने की मान्यता है। गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 30 मिनट से शाम 5 बजे तक रहेगा। वहीं यमगंड दोपहर 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
आज का सूर्य देव का उपाय
रविवार के दिन सूर्य देव की पूजा करना शुभ माना जाता है। आज सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित कर सकते हैं। इसके साथ आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने की भी धार्मिक मान्यता है।