दीपावली 2026: अंधकार से प्रकाश और अज्ञान से आत्मज्ञान की ओर बढ़ने का पर्व, अंधकार में छिपा है प्रकाश का ये संदेश

दीपावली 2026: दीपावली का वास्तविक संदेश केवल घरों को दीपों से सजाना नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन को भी प्रकाशित करना है।...

Diwali 2026
अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का पर्व- फोटो : X

Diwali 2026: कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर आज, रविवार को दीपावली का पावन पर्व श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर घरों, दुकानों, कार्यालयों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की रात्रि मां लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख, समृद्धि, वैभव और धन-धान्य का आगमन होता है। लोग अपने घरों को दीपों, रंग-बिरंगी विद्युत मालाओं और आकर्षक सजावट से आलोकित करेंगे।

पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि रविवार सुबह 10 बजकर 50 मिनट से प्रारंभ होकर सोमवार, 9 नवंबर को दोपहर 11 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। दीपावली केवल दीप प्रज्वलित करने और उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन, आध्यात्मिक जागरण और अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर अग्रसर होने का भी प्रतीक है।

अंधकार में छिपा है प्रकाश का संदेश

दीपावली वर्ष की सबसे अंधकारमय रात्रियों में से एक होती है, किंतु आध्यात्मिक दृष्टि से यह रात्रि प्रकाश की महत्ता का गहन संदेश देती है। जब चारों ओर अंधकार व्याप्त होता है, तब प्रकाश की आवश्यकता और उसका मूल्य सर्वाधिक अनुभव होता है। इसी प्रकार मनुष्य के जीवन में भी अज्ञान, मोह, आसक्ति और अहंकार का अंधकार ज्ञान के प्रकाश से ही दूर हो सकता है। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में मनुष्य की चेतना की यात्रा को मूलाधार से आज्ञा चक्र तक की यात्रा के रूप में समझाया गया है। यह यात्रा स्थूल से सूक्ष्म, भौतिकता से आध्यात्मिकता और अज्ञान से आत्मबोध की ओर बढ़ने का प्रतीक है। मूलाधार चक्र का संबंध भगवान गणेश से तथा आज्ञा चक्र का संबंध भगवान शिव से माना जाता है। शिव और शक्ति को सृष्टि के परिवर्तन तथा चेतना के रूपांतरण का आधार माना गया है।

लक्ष्मी और गणेश के वाहनों में छिपा आध्यात्मिक संकेत

दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष विधान है। मां लक्ष्मी का वाहन उल्लू और भगवान गणेश का वाहन मूषक है। आध्यात्मिक व्याख्या में इन दोनों प्राणियों को मनुष्य की चेतना और उसकी प्रवृत्तियों से जोड़कर देखा जाता है। उल्लू रात्रि में सक्रिय रहता है, जबकि मूषक अंधकार में छिपकर विचरण करता है। प्रतीकात्मक रूप से उल्लू मोह और अज्ञान तथा मूषक भौतिक इच्छाओं और चंचल मन का प्रतिनिधित्व कर सकता है। मनुष्य जब केवल धन, सुख-सुविधाओं और सांसारिक उपलब्धियों को जीवन का अंतिम लक्ष्य मान लेता है, तब वह आत्मिक उन्नति से दूर होने लगता है।

दीपावली पर स्वयं के भीतर भी जलाएं ज्ञान का दीप

दीपावली का वास्तविक संदेश केवल घरों को दीपों से सजाना नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन को भी प्रकाशित करना है। दीपक की लौ हमें स्मरण कराती है कि अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, प्रकाश की एक छोटी-सी किरण उसे चुनौती दे सकती है।

रिपोर्ट- हीरेश कुमार