10 अक्टूबर को है महालय अमावस्या, सबको करना चाहिए इस दिन तर्पण, सर्वपितृ अमावस्या का सबसे खास महत्व
महालय अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या और पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है। खास बात यह है कि जिन पूर्वजों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती, उनका श्राद्ध भी इस दिन किया जा सकता है।
Mahalaya Amavasya : पितृ पक्ष के समापन का दिन महालय अमावस्या हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति व मोक्ष की कामना के साथ तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महालय अमावस्या के साथ पितृ पक्ष समाप्त होता है और पूर्वजों को पृथ्वी लोक से विदाई दी जाती है।
महालय अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या और पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है। खास बात यह है कि जिन पूर्वजों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती, उनका श्राद्ध भी इस दिन किया जा सकता है। कई धार्मिक मान्यताओं में अकाल मृत्यु या अन्य कारणों से असमय मृत्यु को प्राप्त हुए पूर्वजों के निमित्त भी इस दिन श्राद्ध और तर्पण करने का विधान बताया गया है।
कब है महालय अमावस्या?
इस वर्ष महालय अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जाएगी। इसी दिन पितृ पक्ष का समापन होगा। इसके अगले दिन यानी 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होगी। अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे शुरू होगी और 10 अक्टूबर की रात 9:20 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर महालय अमावस्या 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
तर्पण और श्राद्ध के शुभ मुहूर्त
महालय अमावस्या के दिन पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन दोपहर के समय पितरों के निमित्त कर्म किए जाते हैं। प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं— कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक, रोहिणी मुहूर्त: दोपहर 12:31 बजे से 1:18 बजे तक, अपराह्न काल: दोपहर 1:18 बजे से 3:37 बजे तक।
क्यों खास है सर्वपितृ अमावस्या?
पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान परिवार अपने दिवंगत सदस्यों के लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं। पितृ पक्ष का अंतिम दिन होने के कारण महालय अमावस्या को सभी पितरों को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिन पूर्वजों की मृत्यु की तिथि किसी कारण से ज्ञात नहीं है, उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जा सकता है। इस दिन तर्पण, पिंडदान, दान-पुण्य और ब्राह्मण भोज जैसे कर्म किए जाते हैं।
मान्यता है कि श्रद्धा के साथ किए गए इन कर्मों से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इसी वजह से महालय अमावस्या को पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।