SDM रिश्तेदार हैं, शिक्षा विभाग हमारा है, जो करना है कर लो... सरकारी शिक्षक रसूख के दम पर चला रहे काला धंधा, गुरुजी को कोई बोलतई रे!
Bihar Teacher News: 'SDM रिश्तेदार हैं, शिक्षा विभाग हमारा है, जो करना है कर लो।' मानक, नियम, क़ानून और क़ायदे को ताक पर रखकर जिले में सरकारी शिक्षक बेखौफ होकर धंधा चला रहे हैं....
Bihar Teacher News: बिहार में शिक्षा का मंदिर अब धंधे का अड्डा बनता जा रहा है। मानक, नियम, क़ानून और क़ायदे को ताक पर रखकर जिले में सरकारी शिक्षक बेखौफ होकर निजी कोचिंग संस्थान चला रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि सवाल पूछने पर जवाब मिलता है 'SDM रिश्तेदार हैं, शिक्षा विभाग हमारा है, जो करना है कर लो।' यह वही स्थिति है, जिसे कहावत में कहा गया है “जब साईंया भईल कोतवाल, तो डर किस बात का।”
हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल दरभंगा जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी की नाक के नीचे चल रहा है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिखी। जबकि बिहार कोचिंग संस्थान अधिनियम 2010 साफ कहता है कि राज्य में कार्यरत कोई भी सरकारी शिक्षक न तो निजी कोचिंग चला सकता है और न ही उसमें पढ़ा सकता है। फिर सवाल उठता है कि ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर तक यह अवैध कोचिंग का गोरखधंधा कैसे फल-फूल रहा है?
दरभंगा शहर में संचालित कैरियर क्लासेज ऑफ फिजिक्स इसका बड़ा उदाहरण है। इसके संचालक कृष्ण कुमार पटेल एक सरकारी विद्यालय में पदस्थापित शिक्षक हैं, लेकिन बावजूद इसके सुबह-शाम कोचिंग में छात्रों से प्रति माह 600 रुपये वसूलकर पढ़ा रहे हैं। खुलेआम दावा किया जाता है कि शिक्षा विभाग में “अपने लोग” बैठे हैं, इसलिए कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यही नहीं, यह शिक्षक पहले भी अपनी ही छात्रा के साथ अश्लील गाने पर डांस करते हुए वायरल हो चुके हैं, लेकिन तब भी सिस्टम खामोश रहा।
ऐसा नहीं है कि मामला सिर्फ एक-दो शिक्षकों तक सीमित है। आशुतोष विनीत जैसे शिक्षक भी सरकारी नौकरी में रहते हुए निजी कोचिंग में सशुल्क सेवा दे रहे हैं। सवाल पूछने पर सीधे SDM रिश्तेदार को फोन, फिर “मैनेज” करने की पेशकश यानी पैसा दो और मामला रफा-दफा। सूत्रों की मानें तो जिले में करीब दो दर्जन ऐसे शिक्षक हैं, जो खुलेआम छात्रों से मोटी रकम वसूल रहे हैं।
यह सवाल अब शिक्षकों से ज्यादा सिस्टम पर खड़ा हो रहा है। क्या नियम-कानून सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गए हैं? क्या यही वजह है कि सरकारी स्कूलों की पढ़ाई लगातार गिरती जा रही है? क्या कोचिंग संस्थान एक्ट के तहत जिले की कोचिंग संस्थाएं पंजीकृत हैं और क्या उन्होंने यह हलफनामा दिया है कि वहां कोई सरकारी शिक्षक नहीं पढ़ाता?
मामले को नए जिला शिक्षा पदाधिकारी के संज्ञान में लाया गया है। उन्होंने इसे गंभीर बताते हुए जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब देखना यह है कि यह भरोसा कार्रवाई में बदलता है या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दफन हो जाएगा।
रिपोर्ट- वरुण कुमार ठाकुर