Bihar School News: बिहार में रसिक मिजाज गुरुजी की कारगुजारी, कमर तोड़ ठुमकों से कक्षा तक का खेल उजागर,सवालों के घेरे में शिक्षा विभाग की चुप्पी

Bihar School News: आर्केस्टा की चकाचौंध, अश्लील गानों पर कमर तोड़ ठुमके, नोटों की गड्डियों की बरसात और फिर वही शिक्षक सरकारी स्कूल में बच्चों से हाथ-पैर दबवाता नज़र आए यह कोई फिल्मी पटकथा नहीं, बल्कि...

Motihari Education Dept Soft on Teacher Accused of Obscene D
बिहार में रसिक मिजाज गुरुजी की कारगुजारी- फोटो : reporter, X

Bihar School News: बिहार में इन दिनों शिक्षा नहीं, बल्कि शर्मनाक तमाशा सुर्ख़ियों में है। आर्केस्टा की चकाचौंध, अश्लील गानों पर कमर तोड़ ठुमके, नोटों की गड्डियों की बरसात और फिर वही शख़्स सरकारी स्कूल में बच्चों से हाथ-पैर दबवाता नज़र आए यह कोई फिल्मी पटकथा नहीं, बल्कि मोतीहारी ज़िले के हरसिद्धि प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय कन्छेदवा के सहायक शिक्षक मधुसूदन सिंह पर लगे गंभीर आरोप हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने जैसे ही पर्दा उठाया, ज़िले में हड़कंप मच गया। वीडियो में कथित शिक्षक आर्केस्टा नर्तकी के साथ मंच पर अश्लील अंदाज़ में नाचते और दूसरी क्लिप में स्कूल कक्षा के भीतर मेज़ पर पैर रखकर बच्चों से हाथ-पैर दबवाते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य न सिर्फ़ शिक्षक आचरण, बल्कि बिहार सरकारी सेवक नियमावली 1976 की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाता है।

मामला तूल पकड़ते ही 29 दिसंबर को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने कार्यालय पत्रांक 3089 जारी कर 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया। पत्र में साफ लिखा गया कि यह कृत्य सरकारी सेवा नियमों के प्रतिकूल है और समय पर जवाब नहीं देने पर कार्रवाई होगी।लेकिन यहीं से शुरू हुआ फाइलों का अंडरग्राउंड खेल।

स्पष्टीकरण दिए 10 दिन से ज़्यादा बीत चुके हैं, मगर कार्रवाई का नामोनिशान नहीं। न निलंबन, न विभागीय जांच—सिर्फ़ सन्नाटा। ज़िले में अब चर्चा शिक्षा से ज़्यादा “सेटिंग-गेटिंग”, राजनीतिक पकड़ और लिफ़ाफ़ा सिस्टम पर हो रही है। दबे जुबान लोग कह रहे हैं कि रसिक मिज़ाज गुरुजी पर विभाग इसलिए मेहरबान है क्योंकि ऊपर तक मजबूत पकड़ है।

कहीं यह वही पुराना खेल तो नहीं जहाँ दोषी बच निकलता है और सिस्टम तमाशबीन बना रहता है? सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर आम कर्मचारी होता तो क्या 24 घंटे में ही निलंबन नहीं हो जाता?

आज मोतीहारी में हर चाय की दुकान, हर चौक-चौराहे पर एक ही सवाल गूंज रहा है कि जब गुरु ही गुनाहगार बन जाए, तो बच्चों का भविष्य कौन संभाले?शिक्षा विभाग की खामोशी अब खुद कटघरे में खड़ी है।

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार