Jharkhand News: झारखंड में प्रकृति पर्व सरहुल की भक्ति में डूबे श्रद्धालुु, पारंपरिक रीति-रिवाजों से की गई पूजा-अर्चना, शोभायात्रा में हुए पंद्रह हजार से अधिक लोग शामिल

Jharkhand News: झारखंड में इन दिनों महापर्व सरहुल का उत्साह सभी प्रदेशवासियों के सर चढ़कर बोल रहा है। केन्द्रीय सरहुल पूजा समिति की ओर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के मार्ग पर समाजिक संस्थाओं की ओर से सेवा शिविर भी लगाए गए थे।..पढ़िए आगे

Jharkhand News: झारखंड में प्रकृति पर्व सरहुल की भक्ति में ड
झारखंड में प्रकृति पर्व सरहुल की भक्ति में डूबे श्रद्धालुु- फोटो : social media

Ranchi: झारखंड में प्रकृति के पर्व सरहुल का उत्साह चारो ओर देखा जा सकता है।इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस उत्सव पर निकाली गयी शोभायात्रा में पंद्रह हजार से भी अधिक लोग शामिल हुए। उरांव बस्ती और मुंडा समाज के लोगों ने सरना स्थल पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की। इस दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।

केन्द्रीय सरहुल पूजा समिति की ओर से निकाली गई शोभायात्रा

शोभायात्रा में ढोल, नगाड़े और मादर की थाप पर लोग नाचते-गाते शामिल हुए।झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी विधि-विधान से पूजा में हिस्सा लिया। केन्द्रीय सरहुल पूजा समिति की ओर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इससे पूर्व सुबह सभी सरना स्थलों पर आदिवासी समाज की महिलाओं और पुरुषों ने पूजा-अर्चना कर सभी की खुशहाली की प्रार्थना की। पूजा के दौरान फल, फूल, दूध अर्पित कर अपने परिवार एवं समाज की समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।

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कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित

शोभायात्रा से पहले केन्द्रीय सरहुल पूजा समिति की ओर से विभिन्न समाज के अगुवा, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों और राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया गया। इस दौरान आदिवासी अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी जयपाल सिंह सिरका, पूर्व केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, विधायक सरयू राय, विधायक पूर्णिमा दास साहू के अलावा राजकुमार सिंह, अमरप्रीत काले, महावीर मुर्मू, अमित सिंह, बंटी सिंह, शिशिर पूर्ति, विमल कुमार, विकास बालमुचू, मनोज तांती व अन्य शामिल हुए।

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एकता का दिया परिचय

आदिवासी एवं मूलवासी समाज की एकता का परिचय देते हुए उरांव, हो, मुंडा, मुखी, भुइयां, तुरी, लोहरा समाज के हजारों महिला-पुरुष, युवा-युवतियां और बच्चे पारंपरिक परिधान में विभिन्न प्रकार के वाद्ययंत्रों के साथ नृत्य करते हुए आगे बढ़े। प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए जगह-जगह बैनर लगाए गए थे। बच्चों ने हाथों में कट-आउट लेकर जागरूकता फैलाई। शोभायात्रा के मार्ग पर समाजिक संस्थाओं की ओर से सेवा शिविर भी लगाए गए थे।