2005 में नीतीश का क्या था एजेंडा, उस पर सवार नीतीश ने लालू राज का किया था खात्मा,15 सालों से सत्ता में रहने वाले नेता का इस बार होगा बेड़ा पार?

2005 में नीतीश का क्या था एजेंडा, उस पर सवार नीतीश ने लालू राज का किया था खात्मा,15 सालों से सत्ता में रहने वाले नेता का इस बार होगा बेड़ा पार?

DESK बिहार की राजनीति 2005 में इस तरह बदलेगी इसका किसी को अंदाजा तक नहीं था। राज्य के विभाजन के बाद हुए एक ही वर्ष में दो चुनाव पहली बार बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का वाहक बन रहा था। 15 साल के राजद शासन के बाद बिहार की राजनीति ने करवट ली थी। पहली बार विभाजित बिहार में सुशासन एवं विकास राजनीति का मुख्य मुद्दा बना था। अंतत: लालू प्रसाद के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष शासन की समाप्ति हुई और  सत्ता की बागडोर नीतीश कुमार को संभालने का मौका मिला।

राज्य के बिहार में 243 विधानसभा सीट के लिए फरवरी 2005 में हुए चुनाव में किसी दल को सरकार बनाने के लिए पर्याप्त बहुमत नहीं मिली थी। गठबंधन की सरकार बनाने को बेताब राजद को इस बार सत्ता की चाभी नहीं मिली। सत्ता की चाभी अपने पास होने का दावा करते लोक जनशक्ति पार्टी भी अंततः कोई विकल्प नहीं सामने ला सकी। ऐसे में चुनाव में जाने के सिवाय कोई विकल्प नहीं था। 

फिर, अक्टूबर 2005 में हुए चुनाव में जदयू व भाजपा गठबंधन को बहुमत हासिल हुई। फरवरी में जहां राजद के सत्ता में पुन: वापसी के कयास लगाए जा रहे थे। वहीं आठ महीने के अंतराल पर हुए दोबारा चुनाव में बिहार की राजनीतिक परिस्थिति पूरी तरह बदल गयी। इस चुनाव में जनता ने राजनीतिक बदलाव को लेकर स्पष्ट संकेत दिए। सत्ता का जो समीकरण फरवरी में उलझा हुआ था वह अक्टूबर आते-आते पूरी तरह स्पष्ट हो गया। 


क्या था नीतीश कुमार का एजेंडा

2005 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन ने बिहार में विकास के नाम पर बिहारियों से वोट मांगा था। अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य,सड़क,बिजली, पानी, गरीबों को उनका हक और सबसे बड़ा इश्यू कानून का राज स्थापित करने की बात कह सत्ता में आए नीतीश कुमार ने कितना काम किया, कितना नहीं ये सब सामने है। 

विपक्ष का वार

लगातार तीन बार से सत्ता संभाल रहे नीतीश कुमार पर विपक्ष अब लगातार निशाना साध रहा है।पूछ रहा- 15 साल से क्या कर रहे थे नीतीश कुमार? विकास के नाम पर बिहारियों को सिर्फ ठगा है नीतीश कुमार ने, न तो अच्छी शिक्षा दे पाए ना ही स्वास्थ्य व्यवस्था। विकास के नाम पर सिर्फ घोटाला किया है इनकी सरकार ने। विपक्ष कह रहा कि नीतीश कुमार के राज में 65 घोटाले हुए। टूटती सड़क ओर पुल का हवाला देते हुए विपक्ष ने कहा ऐसे काम करते हैं नीतीश कुमार। विपक्ष ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा 15 साल में नीतीश कुमार ने बिहार को विकास के रास्ते से हटा कर और पीछे धकेल दिया है, रोजगार के नाम पर लोगों को बेरोजगार बनाया है नीतीश कुमार की सरकार ने। पलायन, बढ़ती महामारी, गरीबों को भुखमरी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है और बात करते हैं ये विकास और रोजगार की। कृषि क्षेत्र में उद्योग की संभावना रहने के बावजूद यह क्षेत्र उद्योग विहीन बना हुआ है। रोजगार सृजन नहीं होना श्रम पलायन का मुख्य कारण है। पहले की अपेक्षा क्षेत्र में मौलिक सुविधाओं और विकास को बल दीजिये। कृषि यहां के लोगों की जीविका का मुख्य साधन है। कृषि आधारित उद्योग नहीं रहने से किसानी अब घाटे का सौदा बनता जा रहा है और लोग पलायन करने पर मजबुर हैं। कल कारखानों को बंद करके इन्होंने गरीबों के पेट पर लात मारी है, ये ना तो हम भूलेंगे ना भूलने देंगे।

उद्दयोग के मसले पर सरकार ने भी विपक्ष पर किया पलटवार कहा ये सब इनकी देन है। कारखानों को बन्द करवाकर उनमें जंग लगवाने का काम किया है लालू सरकार ने और अब अपनी गलती दूसरे पर डाल रही है इनकी पार्टियां। साथ ही नीतीश कुमार ने ये भी कहा ये इनकी पुरानी आदत है। जंगल राज में जो हुआ वो पूरे बिहार ने भुगता है, और अब बिहार उस इतिहास को कभी नहीं दोहराएगा


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