कुएं में गिरे मासूम को बचाने के खुद उसमें कूद गया 50 वर्षीय ग्रामीण, सही समय पर मदद नहीं मिलने से दोनों की हो गई मौत

 कुएं में गिरे मासूम को बचाने के खुद उसमें कूद गया 50 वर्षीय ग्रामीण, सही समय पर मदद नहीं मिलने से दोनों की हो गई मौत

AURANGABAD : औरंगाबाद देव थाना क्षेत्र के पड़रिया गांव में गुरुवार की शाम कुएं में गिरने पर एक बच्चें को बचाने के दौरान बच्चे समेत बचानेवाले की भी मौत हो गई। इस घटना के बाद दोनों परिवार के साथ पूरे गांव में मातम पसर गया। वहीं कुछ लोगों ने इस पूरे हादसे के लिए सरकार और प्रशासन को जिम्मेदारा बताया है। 

बताया जाता है कि पड़रिया गांव के राधामोहन विश्वकर्मा का दस वर्षीय पुत्र प्रकाश विश्वकर्मा गुरूवार की शाम गांव में कुएं के पास खेल रहा था। खेलने के दौरान ही वह कुएं के मुंडेर के जमीन के समतल होने के कारण पैर फिसलने से कुएं में जा गिरा। कुएं में पानी से ज्यादा कीचड़ जमा था, इस कारण बच्चा कीचड़ में बुरी तरह फंसकर कीचड़ में धंसने लगा। यह देख पास से गुजर रहे गांव के ही 50 वर्षीय लालदेव सिंह कुएं की गहराई और कीचड़ की थाह लिए बिना बगैर रस्सी के बच्चें को बचाने कुएं कूद पड़े। कुएं में कीचड़ के दलदला होने के कारण बच्चें को बचाने कुएं में कूदा व्यक्ति भी दलदल में में फंस गया और समय पर बाहरी सहायता नही मिलने से दोनों की कुएं के दलदल में धंसकर मौके पर ही मौत हो गई।

हालांकि हादसे की जानकारी मिलने पर मौके पर जुटे ग्रामीणों ने अथक प्रयास कर दोनो को कुएं से बाहर निकाला। दोनो की हालत गंभीर मानते हुए जीवित समझकर आनन-फानन में ग्रामीणों और परिजनों ने इलाज के लिए औरंगाबाद सदर अस्पताल लाया। सदर अस्पताल में दोनों को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। हादसे की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची देव थाना की पुलिस आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी कर दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराने में जुटी है। हादसे के बाद औरंगाबाद सदर अस्पताल परिसर का जर्रा जर्रा मृतकों के परिजनों के चित्कार से सिहर उठा। 

कुएं का मुंडेर ऊंचा नहीं करने के कारण हादसा

अस्पताल में पास में मौजूद लोगो का भी कलेजा परिजनों के चित्कार और रूदन से रो पड़ा। बच्चें की मां का रो-रोकर बुरा हाल है। दो मौतों के बाद पड़रियां गांव में मातम पसरा है। गांव का हर व्यक्ति गमगीन है। हालांकि कुछ ग्रामीणों ने हादसे के लिए सरकार की जल जीवन हरियाली योजना के तहत कुएं की मुंडेर को जमीन से उंचा नही कराने और योजना के तहत कुएं की सफाई नही कराये जाने को भी दोषी ठहराया है। इनका कहना है कि योजना के तहत यदि पहले ही कुएं की साफ-सफाई कर मुंडेर को जमीन से ऊंचा कर दिया जाता तो यह हादसा नहीं होता।

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