बिहार के बीएड कॉलेजों में फर्जी तरीके से हुए 6 हजार नामांकन होंगे रद्द, रजिस्ट्रेशन वैध करार देने की अपील हाईकोर्ट ने की खारिज

बिहार के बीएड कॉलेजों में फर्जी तरीके से हुए 6 हजार नामांकन होंगे रद्द, रजिस्ट्रेशन वैध करार देने की अपील हाईकोर्ट ने की खारिज

PATNA : बिहार के बीएड कॉलेजों ने 2018-20 के सत्र में फर्जी तरीके से तकरीबन 6 हजार से ज्यादा छात्रों का नामांकन अपने कॉलेजो में कर लिया। अब उन छात्रों का भविष्य अधर में है। जब इसकी भनक विश्वविद्यालय प्रशासन को लगी तो प्रारंभिक जांच शुरू कर दी।

प्रारंभिक जांच के बाद जो आंकड़े सामने आए वह काफी चौंकाने वाले थे। विभिन्न विश्वविद्यालयों से संबंधित B.Ed कॉलेजों ने सत्र 2018-20 के लिए करीब छह हजार से ज्यादा छात्र छात्राओं का नामांकन फर्जी तरीके से ले लिया था।

गौरतलब है कि सिर्फ पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय से संबंधित B.Ed कॉलेजों में 700 से अधिक छात्रों का नामांकन फर्जी तरीके से किया गया है।

वहीं बिहार के वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा में भी गलत तरीके से नामांकन लेने वाले छात्रों की की जांच की जा रही है।

पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी की मानें तो बीएड सीईटी आयोजन की नोडल एजेंसी नालंदा खुला विश्वविद्यालय से अनुमति पत्र प्राप्त छात्रों की सूची से जब बीएड में नामांकन लेने वाले छात्रों की सूची का मिलान किया गया तो गलत तरीके से नामांकन की जानकारी मिली।

गौरतलब है बिहार के सभी सरकारी व निजी बीएड कॉलेजों में सत्र 2018- 20 का नामांकन B.Ed सीईटी के मानकों के अनुसार ही करना था।

बता दें कि B.Ed कॉलेज उन्हीं छात्र छात्राओं का एडमिशन ले सकता था, जिन्हें नालन्दा खुला विश्वविद्यालय की तरफ से अनुमति पत्र दिया गया था। वहीं दूसरी तरफ बिहार के निजी कॉलेजों ने मनमानी करते हुए बगैर नालन्दा खुला विश्वविद्यालय से अनुमति पत्र प्राप्त किए छात्रों का ऐडमिशन अपने कॉलेज में ले लिया ।

इतना ही नहीं नालन्दा खुला विश्वविद्यालय की तरफ से अनुमति प्राप्त पत्र किये बगैर एडमिशन लिए छात्रों में से से करीब 4000 छात्रों का रजिस्ट्रेशन भी विश्ववद्यालयों ने स्वीकार कर लिया। विश्वविद्यालयों के द्वारा उनके प्रथम वर्ष की परीक्षा में शामिल होने के फार्म भी स्वीकार किए कर लिए गए। विश्विद्यालय प्रशासन का कहना है कि अनुमति पत्र प्राप्त छात्रों की वैधता का पता लगाना कॉलेजों के काम है।

वहीं दूसरी तरफ जब निजी निजी बीएड कॉलेजों के द्वारा फर्जी तरीके से नामांकन होने की बात लेने की बात सामने आई तो विश्वविद्यालय ने जांच करना शुरू किया। जब छात्रों ने रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर बवाल काटना शुरू किया तो निजी बीएड कॉलेजों तरफ से हाईकोर्ट में अपील कर वैसे छात्रों का नामांकन वैध करने की अर्जी दी गयी जिन्हें नालन्दा खुला विश्वविद्यालय ने अनुमति पत्र नहीं दिया था। 

इसके पीछे बीएड कॉलेजों के द्वारा जो तर्क दिया गया था वह यह था की 2018-20 में B.Ed की आधी से अधिक सीटें खाली रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट से दोबारा काउंसलिंग से अनुमति न मिलने तथा छात्रों के कैरियर को ध्यान में रखना था। लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए सभी छात्र छात्राओं के नामांकन को अवैध करार दिया, जिन्हें नालंदा खुला विश्वविद्यालय से अनुमति पत्र नहीं मिला है।

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