मोदी सरकार से AFSPA हटाने की मांग के लिए 70 किलोमीटर का विरोध मार्च

मोदी सरकार से AFSPA हटाने की मांग के लिए 70 किलोमीटर का विरोध मार्च

DESK. दिल्ली. पूर्वोत्तर भारत में सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून की आड़ में कई बार आम नागरिकों के शिकार होने की  खबर आ चुकी है. दिसम्बर 2021 में भी ऐसे ही एक मामले में नगालैंड में 14 नागरिकों को उग्रवादी समझकर सशस्त्र सेना ने गोलियां का शिकार बनाया था. इसके बाद से पूरे देश में एक बार फिर से पूर्वोत्तर के राज्यों से सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून यानी AFSPA हटाने की मांग जोर पकड़ चुकी है. 

अब नगालैंड से सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (AFSPA) हटाने और मोन जिले में सुरक्षाबलों की गोलीबारी में मारे गये 14 आम नागरिकों के लिए इंसाफ की मांग करते हुए सैकड़ों नगा लोगों ने दो दिवसीय पैदल मार्च में हिस्सा लिया है. पैदल मार्च  दीमापुर से 70 किलोमीटर दूर राज्य की राजधानी कोहिमा तक निकाला गया और 70 किलोमीटर की इस पदयात्रा में शामिल लोग हाथों में तख्तियां और बैनर लिये हुए थे. इन बैनरों में AFSPA कानून को निरस्त करने की मांग की गयी थी. इस क्रम में लोगों ने 14 आम नागरिकों की मौत के मामले में इंसाफ के लिए नारे लगाये.

विभिन्न नागा सिविल सोसाइटी संगठनों द्वारा दो दिवसीय वॉकथॉन (Walkathon) का नेतृत्व किया गया.  प्रतिभागियों ने आज मंगलवार को फिर से मार्च शुरू करने से पहले सोमवार रात को पिफेमा में विश्राम किया.  जानकारी के अनुसार वॉकथॉन के नेता कोहिमा में राज्य के कार्यवाहक राज्यपाल जगदीश मुखी के जरिये केंद्र को ज्ञापन सौंपेंगे.

ईस्टर्न नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन के अध्यक्ष चिंगमैक चांग ने कहा कि अफस्पा को जल्द से जल्द हटाने के वास्ते केंद्र और राज्य सरकार  को याद दिलाने के लिए यह पैदल मार्च (Walkathon) आयोजित किया गया है.   कहा कि अफस्पा के खिलाफ लोगों की नाराजगी को व्यक्त करने और नगा लोगों की गरिमा की रक्षा करने के लिए आयोजित यह मार्च बहुत ही शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चल रहा है.

चांग ने कहा, “जब तक सरकार हमारी मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देती, हम विभिन्न तरीकों से अपने कार्यक्रम जारी रखेंगे   उन्होंने कहा कि AFSPA को खत्म करने की जनता की मांग पर विचार किये बिना केंद्र ने 30 दिसंबर को इसे 6 महीने के लिए और बढ़ा दिया. यह असहनीय है.

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