8 साल बाद बिहार के विधायकों के बंगला निर्माण पर हुआ चौकाने वाला खुलासा, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

8 साल बाद बिहार के विधायकों के बंगला निर्माण पर हुआ चौकाने वाला खुलासा, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

Patna- बिहार के विधायकों– विधानपार्षदों के लिए सरकार नया भवन बनवा रही है. राज्य सरकार राजधानी पटना के वीरचंद पटेल पथ स्थित विधायकों के पुराने क्वार्टर को तोड़कर मॉडल विधायक आवासन भवन परियोजना के तहत नया फ्लैट बनवा रही है. नया भवन निर्माण का काम अंतिम चरण में है.

नीतीश कैबिनेट की स्वीकृति के बिना निकाला गया टेंडर

8 सालों बाद बिहार के विधायकों के बंगला निर्माण पर हुआ चौकाने वाला खुलासा हुआ है. विधायकों- विधानपार्षदों के लिए बन रहे मॉडल भवन के टेंडर में बड़ी गडबड़ी खुलकर सामने आयी है. भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से नीतीश कैबिनेट की स्वीकृति के बिना ही 2 भागों में बांटकर मॉडल विधायक भवन परियोजना का टेंडर निकाल दिया गया था.

विभागीय मंत्री के तौर पर सीएम नीतीश से ली गई थी सहमति

इस मामले में विभागीय मंत्री के तौर पर मुख्यमंत्री से सहमति ली गई थी. लेकिन इतनी बडी योजना के लिए सिर्फ मंत्री नहीं बल्कि कैबिनेट की स्वीकृति आवश्यक थी. लेकिन भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया. आठ सालों बाद अब जाकर भवन निर्माण विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता सहित दो इंजिनियरों को दंड मुकर्रर किया गया है.

बिना मंत्रिमंडल की स्वीकृति के ही योजना को बांटा गया 2 भागों में

भवन निर्माण विभाग ने जो अधिसूचना जारी की है उसमें बताया गया है कि विधायकों– विधानपार्षदों के लिए मॉडल आवासन भवन बनाना था. इसके लिए बिहार कैबिनेट ने 30 दिसमंबर 2011 को 307 करोड़ 73 लाख रू की स्वीकृति दी थी. कैबिनेट ने विधानसभा और विधानपरिषद के सदस्यों के आवासीय भवनो के निर्माण के लिए संयुक्त प्रशासनिक स्वीकृति दी थी. इसके बाद भवन निर्माण विभाग ने उक्त योजना को दो भागों में बांट दिया. योजना को दो भागों में बांटने की स्वीकृति बिहार कैबिनेट से नहीं ली गई.

सिर्फ विभागीय मंत्री जो उस समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही थे उनसे अनुमोदन लिया गया. इसके बाद निविदा जारी कर दी गई. विभाग ने जांच में पाया है कि विधि सम्मत कार्रवाई किए बिना ही गलत प्रस्ताव दिया गया. विभाग ने पाया कि तत्कालीन मुख्य अभियंता रमेश कुमार और तत्कालीन योजना अभियंता योगेन्द्र नाथ दूबे की भूमिका संदिग्ध है. इसके बाद इन दो अभियंताओं के खिलाफ 2 अप्रैल 2018 को विभागीय कार्रवाही शुरू की गई.

लघु दंड के तौर पर निंदन की सजा

विभागीय कार्रवाई के करीब 1 साल बाद भवन निर्माण विभाग ने दोनों अभियंताओं के उपर लगे आरोपों को प्रमाणित पाया है. विभाग ने पाया कि योजना में मंत्रिपरिषद की स्वीकृति जरूरी था. इसके बाद विभाग ने दोनों अभियंताओं को लघु दंड संसूचित किया है. लिहाजा दो इंजीनियरों को लघु दंड के रूप में निंदन की सजा दी गई है. इस संबंध में भवन निर्माण विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है.

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