नीतीश को नागवार गुजरा है भाजपा नेता का एक बयान! NDA से ‘मोहभंग’ होने की पूरी पटकथा को समझिए

नीतीश को नागवार गुजरा है भाजपा नेता का एक बयान! NDA से ‘मोहभंग’ होने की पूरी पटकथा को समझिए

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं. वे जदयू के विधायकों और सांसदों की बैठक कर रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि बैठक में यह तय किया जाएगा कि आखिर किन कारणों से जदयू अब एनडीए से नाता तोड़ने की कोशिश में है. हालांकि कहा जा रहा है कि इस राजनीतिक घटनाक्रम की पटकथा कुछ दिनों पूर्व भाजपा के एक बड़े नेता के बयान के बाद लिखी जानी शुरू हुई. 

30 और 31 जुलाई को पटना में भाजपा के संयुक्त मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक हुई थी. उसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि देश में अब एक मात्र पार्टी के रूप में भाजपा बचेगी. यानी आने वाले समय में देश के किसी दल के अस्तित्व भाजपा रहने नहीं देगी. कहा जा रहा है कि नड्डा का यह बयान नीतीश कुमार को नागवार गुजरा. इसी दौरान जदयू से इस्तीफा दे चुके पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी को लेकर भी एक खुलासा हुआ कि उनके इशारे पर जदयू को तोड़ने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए भाजपा की ओर से जदयू के विधायकों को 6 करोड़ रुपए और मंत्री पद का ऑफर देने की बात कही गई. 

मंगलवार को नालंदा से सांसद कौशलेन्द्र ने भी दावा किया है कि जदयू के विधायकों को भाजपा की ओर से तोड़ने के लिए प्रलोभन दिया गया था. यहां तक कि रविवार को जदयू अध्यक्ष ललन सिंह ने भी कहा था कि वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमर को कमजोर करने के लिए चिराग मॉडल अपनाया गया. बाद में आरसीपी के रूप में फिर से चिराग मॉडल 2 लाया जा रहा था. लेकिन समय रहते जदयू ने इसे पहचान लिया. उन्होंने कहा था कि हम सब जानते हैं कि चिराग मॉडल किसका था. कहा गया कि उनका इशारा भाजपा की ओर था. 


दरअसल, 2020 में चिराग मॉडल के कारण जदयू ने जिन विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ा वहां लोजपा ने अपने उम्मीदवार उतारे. इससे जदयू को बड़ा झटका लगा और उसके सीटों की संख्या घटकर 43 रह गई. यानी जदयू का कद छोटा करने की कोशिश 2020 में शुरू हुई. अब नड्डा का छोटे दलों को खत्म करने की ओर इशारा वाली टिप्पणी से नीतीश कुमार नाराज बताए जाते हैं. 

कहा जा रहा है कि इन्हीं कारणों से नीतीश कुमार अब भाजपा को सबक सिखाना चाहते हैं. वे मंगलवार को होने वाली बैठक में दो प्रकार की घोषणा कर सकते हैं. या तो वे एनडीए से अलग होकर राजद के साथ मिलकर सरकार बनाने का निर्णय लेंगे. या फिर यह भाजपा पर प्रेशर पोलिटिक्स की राजनीति होगी. इससे भाजपा का छोटे दलों के अस्तित्व को दी गई चुनौती को नीतीश अपनी इस रणनीति से मुंहतोड़ जवाब देंगे. साथ ही भविष्य में भी नीतीश कुमार ही बिहार में एनडीए में बॉस रहेंगे इसके लिए भी भाजपा पर दवाब बनाएंगे. 


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