'आएगा तो नीतीश ही'पर लालटेन की बह रही हवा और हनुमान बने संजीवनी तलाश रहे चिराग का हाल वोटकटवा ....मतदान के बाद हो रही चर्चा...

'आएगा तो नीतीश ही'पर लालटेन की बह रही हवा और हनुमान बने संजीवनी तलाश रहे चिराग का हाल वोटकटवा ....मतदान के बाद हो रही चर्चा...

मुकुंद सिंह...
पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दूसरे चरण का मतदान खत्म हो गया है। वोटिंग खत्म होने के बाद मतदाता के साथ-साथ राजनीतिक गलियारे के लोग भी इस बार के विधानसभा चुनाव की सियासी चक्रव्यू के बारे में कुछ आंकड़ा नहीं लगा रहे हैं। एक तरफ जहां कुछ लोगों के दिलों में नीतीश कुमार बसे हुए हैं जो अपने सुशासन की सरकार की बातें याद दिलाते हुए लोगों से वोट देने की अपील कर रहे हैं तो दूसरी तरफ तेजस्वी यादव युवाओं को नौकरी देने और युवा वोट बैंक की सेंधमारी करने में लगे हुए हैं। हालांकि इसमें उन्हें युवाओं का काफी सहयोग भी मिल रहा है उनकी रैलियों में इकट्ठी हो रही भीड़ को देखकर यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता इस बार बिहार के सत्ता सिंहासन पर कौन विराजमान होगा। 

वहीं अगर बात करें लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान की तो इस विधानसभा चुनाव में वह एनडीए से खुद को अलग कर चुनावी मैदान में हैं और खुद को मोदी का हनुमान बताते हुए बिहार की सत्ता का संजीवनी ढूंढने निकल पड़े हैं। लेकिन पिछले दो चरणों के हुए मतदान में यह देखने को मिला कि उनकी हालात सिर्फ वोट कटवा वाला ही है अपनी ही सीटिंग सीट बचा ले तो यह काफी होगी। कुछ इसी तरह की चर्चा पूरे राज्य में हो रही है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं बिहार की अधूरी राजनीति की जानकारी रखने वाले और चाय पान की दुकान पर एक दूसरे से राजनीतिक डिबेट करने वाले लोग...


आपको बताते चलें कि यूं तो बिहार के हर चौक चौराहे से लेकर जहां कहीं भी दो चार पांच लोग जमा हो जाते हैं वही बिहार का चुनावी माहौल रण क्षेत्र का माहौल बन जाता है। सभी अपने पसंद के नेता की तारीफ करते हुए एक दूसरे से झगड़ने लगते हैं कोई नीतीश कुमार के सुशासन की सरकार की बात कहता है तो कोई युवाओं के रोजगार और नौकरी की बात तो कोई बिहार के विकास की बात कहते हुए आपस में डिबेट करने लगते हैं। इस डिबेट में बहुत सारे वैसे लोग भी इकट्ठा हो जाते हैं जो आसपास टोला मोहल्ला के होते हैं और वह श्रोता बनकर सभी की बात सुनते हैं। इस दौरान कई बार हल्की नोकझोंक भी होती है पर आपसी राजनीतिक चर्चा का बात करते हुए सभी शांत हो जाते हैं। सभी लोगों का अपना अपना तर्क होता है पर सारी चर्चा नोकझोंक के बाद सभी एक ही निष्कर्ष पर पहुंचते हैं । इस चुनाव में कांटे की टक्कर चल रही है और कुछ भी कहा नहीं जा सकता... 'आएगा तो नीतीश ही'पर लालटेन की बह रही हवा और हनुमान बने संजीवनी तलाश रहे चिराग का हाल वोटकटवा ...

चाय की दुकान से शुरू हुई सरकार बनाने की चर्चा....
कुछ इसी तरह की चर्चा राजधानी पटना के बांकीपुर विधानसभा कि एक चाय दुकान पर हो रही थी ।देखते ही देखते कुछ लोग वहां जमा हो गए और यह राजनीतिक चर्चा हल्की नोकझोंक में बदल गई। इस राजनीतिक चर्चा में ना तो क्षेत्रीय कोई मुद्दा था और ना ही अपने क्षेत्र के उम्मीदवार के जीतने हारने की चर्चा। यह चर्चा तो बिहार के सियासत की थी आखिरकार इस चुनाव में कौन बिहार की गद्दी पर विराजमान होगा। क्या फिर से नीतीश कुमार के सुशासन की सरकार बनेगी या बिहार की कमान महागठबंधन के हाथों में जाएगा । 

आएगा तो नीतीश ही लेकिन लालटेन की हवा है...
दर्जनों लोगों के बीच चाय की चुस्की लेते हुए करीब चार पांच लोग दूसरे चरण के मतदान के बाद बिहार में किसकी सरकार आ रही है इस पर चर्चा कर रहे थे चर्चा करने वाले कोई महागठबंधन का पक्षधर था तो कोई एनडीए गठबंधन का वही उनकी बातों को सुन रहे लोगों की भी हाल कुछ ऐसी ही थी पर जानकारी के अभाव में या कुछ और सभी चुपचाप सुन रहे थे। आइए जानते हैं कैसे शुरू हुई चाय की चुस्की के साथ राजनीति की चर्चा और काफी नोकझोंक के बाद भी कुछ निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे लोग फिर अंत में यह कहते हुए शांत हो गए कि आएगा तो नीतीश ही लेकिन लालटेन की हवा बह रही है।...

जैसे ही पूछा कल के मतदान का क्या हुआ फिर ज्ञाता बनाने लगे अपने अपने नेता की सरकार....
हल्की ठंडी के बीच चाय की दुकान पर पहुंचे चार पांच लोगों ने जैसे ही शुरू किया कल के मतदान के बाद क्या अनुमान लगाया जा रहा है। फिर क्या था वहां मौजूद कुछ लोग राजनीति के ज्ञाता बन गए और कहने लगे मतदान से क्या यह तो फिक्स ही है कि बिहार में नीतीश कुमार फिर से सरकार बना रहे हैं तो दूसरी तरफ बैठे राजद समर्थक कुछ लोगों ने कहा कि इस बार के चुनावी रैली को देखकर आप लोग यह अंदाजा नहीं लगा रहे कि पूरे राज्य की जनता तेजस्वी यादव के साथ है और बिहार में तेजस्वी यादव की सरकार बन रही है। फिर क्या था दोनों तरफ से सवाल-जवाब होने लगा सब अपने-अपने दलील देने लगे ।कोई नीतीश कुमार के सुशासन की सरकार और उनके विकास के कामों की चर्चा कर उनकी सरकार बना रहा था तो कोई बिहार में रोजगार और नौकरी के मुद्दे पर तेजस्वी यादव की सरकार बना रहा था। उनका कहना था कि तेजस्वी यादव के आने के बाद बिहार में बहार होगा और युवाओं को रोजगार के साथ-साथ नौकरी भी मिलेगा। कुछ इसी तरह की चर्चाएं हैं काफी देर तक चली ।इतनी में ही एक और नीतीश समर्थक वहां पहुंचे जिन्होंने पूरे चर्चे में ही आग लगा दी।पहुंचते ही उन्होंने कहा कि जिस तेजस्वी यादव पर आप लोग इतना चर्चा किए जा रहे हैं उसके राजनीतिक कैरियर के बारे में कितना जानते हैं आप। इससे पहले जब बिहार में राजद की सरकार थी तो 15 साल के जंगलराज की चर्चाएं इतिहास के पन्नों में दर्ज है दूसरी बार जब नीतीश कुमार के साथ बिहार में राजद सरकार बनाई तो मिट्टी तक बेच दिया। अब मिट्टी बेचने वालों कि दोबारा फिर से सरकार बनी तो क्या बिहार बेच दिया जाएगा या उस मॉल को बनाया जाएगा जिसको लेकर उस वक्त की विपक्ष की सरकार ने उनकी  सरकार गिरा दी थी। 


हल्की ठंडी में चाय की चुस्की के साथ राजनीतिक गर्मा गर्मी का चिराग पर हुआ अंत....
नीतीश समर्थकों द्वारा इस तरह की बात कहे जाने के बाद राजद समर्थक भी कहां चुप रहने वाले थे। तुरंत उन्होंने भी जवाब दिया नहीं चाहिए वैसी तानाशाह सरकार जिसने नौकरी के नाम पर लोगों को सिर्फ बरगलाने की कोशिश की है और इनके सरकार में भी घोटाले की कमी नहीं है छात्रवृत्ति से लेकर सृजन घोटाला और सबसे बड़ी बात तो हुई ही नहीं मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड भी इन्हीं के सरकार में हुई अब बताइए क्या फिर से बिहार में नीतीश की सरकार बनेगी या नए चेहरे को मौका मिलना चाहिए। फिर भीड़ से किसी ने धीमे स्वर में कहा लालू के बड़का बेटा  तेज प्रताप का क्या हाल है का हसनपुर से इस बार चुनाव जीत जाएंगे। तो नीतीश समर्थकों ने कुछ इस अंदाज में जवाब दिया जिसके बाद सभी चुप हो गए। क्या शंख और बांसुरी बजाने के साथ-साथ चंदन टीका करने से विधानसभा चुनाव जीता जा सकता है। क्या हुआ महुआ से भी तो वह चुनाव जीते थे 5 साल विधायक रहने के बाद भी महुआ की क्या स्थिति है किसी से छुपी हुई नहीं है हसनपुर को क्या बदलेंगे। वहां अजय राय का अपना वर्चस्व है और उन्होंने वहां की जनता से काम के आधार पर वोट मांगा है  अब आगे क्या होगा यह तो 10 तारीख को ही पता चलेगा ।कुछ इसी तरह की डिबेट चल रहा था तभी पीछे से एक श्रोता ने कहा उ जो चिराग पासवान हनुमान बनकर घूम रहे हैं उनका क्या उनके बारे में भी कुछ कहिए फिर क्या था नीतीश और राजद समर्थकों ने एक स्वर में कहा वह तो झूठे ड्रामा किए जा रहे हैं संजीवनी लाने की खोज में निकले हैं पर अपनी सीटिंग सीट भी बचा लें तो काफी है। उनकी हालत तो सही में वोट कटवा वाली है। जहां कहीं भी उनके प्रत्याशी खड़े हैं उनका तीसरा या चौथा नंबर आ रहा है। याद नहीं है किस तरह बाबूजी की मौत के बाद उनका वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह ठहाका का लगा कर हंस रहे थे ।

किस के हाथ लगी बिहार की सत्ता यह तो 10 को ही होगा फैसला...
यह तो थी राजधानी पटना के बांके पुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों की चर्चा कुछ इसी तरह की चर्चा पूरी बिहार में इस बार के विधानसभा चुनाव को लेकर हो रही है ।जिसमें सभी लोगों की अपनी अपनी राय हैं। जिसे यह लोग आपस में ही डिस्कस करते हैं। इन लोगों की राय और बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में बिहार की जनता किन्हें अपना आशीर्वाद देती है इस बात का पता तो 10 नवंबर को ही चलेगा तब तक के लिए कुछ इसी तरह कयासों का बाजार गर्म रहेगा कोई नीतीश की सरकार बनाएगें तो कोई तेजस्वी की।


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