आसान नहीं है नागा साधु बनना इसके लिए चुकाने होंगे डेढ़ लाख रूपए

आसान नहीं है नागा साधु बनना इसके लिए चुकाने होंगे डेढ़ लाख रूपए

डेस्क... भस्म से सने, चिलम लिये या फिर निर्वस्त्र दिखने के कारण कुंभ मेले (Kumbh Mela 2021) में सबसे ज़्यादा आकर्षण नागा साधुओं का ही रहता है. ताज़ा खबरों की मानें तो हरिद्वार महाकुंभ मेले में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा की ओर से 500 से ज्यादा ने नागा संन्यासी के तौर पर दीक्षा (Naga Deeksha) ली. श्री दुखहरण हनुमान मंदिर में अखाड़ा धर्म ध्वजा के तले आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी द्वारा दीक्षा कार्यक्रम हुआ. क्या आपको पता है कि कोई बालक नागा साधु किस तरह बनता है या बन सकता है? नागा साधु बनने की यात्रा जितनी कठिन है, उतनी ही रोमांचक भी है.

क्या कोई प्रक्रिया है?

नागा साधु बनने की राह आसान नहीं है. हज़ारों साल पुरानी परंपराओं के हवाले से वर्तमान में इस प्रक्रिया के बारे में बताया जाता है कि अगर आपके भीतर संन्यासी जीवन की प्रबल इच्छा है तभी आप नागा साधु बन सकते हैं. महाकुंभ से ही यह प्रक्रिया शुरू होती है, जब देश भर के कुल 13 अखाड़ों में से किसी में रजिस्ट्रेशन करवाना होता है. इसके लिए शुरूआती पर्ची के तौर पर करीब 3500 रुपये का शुल्क होता है. इसके बाद किसी रजिस्टर्ड यानी प्रतिष्ठित नागा साधु की शरण में जाना होता है. यहां कई तरह के प्रण और व्रत करवाए जाते हैं, जिनमें गुरु सेवा के साथ ही ब्रह्मचर्य का पालन बताया जाता है. 6 से 12 साल तक की कठिन तपस्या के बाद अगर गुरु संतुष्ट होते हैं तो नागा साधु बनने का मार्ग खुल जाता है. 

कैसे बनते हैं नागा साधु?
 तीन चरणों में यह प्रक्रिया संपन्न होती है. सबसे पहले नागा साधु बनने के इच्छुक को अपना ही पिंडदान करना होता है. इसके लिए पांच गुरुओं की ज़रूरत पड़ती है. हर गुरु को करीब 11000 रुपये की दक्षिणा देना होती है और फिर ब्राह्मण भोज भी करवाना होता है. इस प्रक्रिया में बताया जाता है कि करीब डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च अगर शिष्य न उठा सके तो उसके गुरु के पास यह रकम देने का अधिकार होता है.

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