देश में विकास में बाधक है असामान्य रूप से बढ़ रही जनसंख्या, इस पर नियंत्रण करने से बनी रहेगी सामाजिक समरसताः अरविन्द सिंह

देश में विकास में बाधक है असामान्य रूप से बढ़ रही जनसंख्या, इस पर नियंत्रण करने से बनी रहेगी सामाजिक समरसताः अरविन्द सिंह

PATNA:  जनसंख्या नियंत्रण विधेयक के उत्तर प्रदेश में पास होने के बाद से ही बिहार में इसपर जोर-शोर से राजनीति जारी है। पहले सीएम ने बिहार में जरूरत नहीं बताई। सीएम के मुताबिक कानून से ज्यादा जरूरी है इस मामले पर प्रचार-प्रसार ज्यादा जरूरी है। वहीं बीजेपी के मंत्रीगण इसे जल्द ही बिहार में लागू करने की बात कह रहे हैं। इसी संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अरविन्द कुमार सिंह ने कहा है कि सालाना 1% की जनसंख्या वृद्धि दर वाला भारत धीरे-धीरे दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने के करीब पहुंच रहा है।  विश्व बैंक के अनुमानित अनुमान के अनुसार, 2021 में भारत की जनसंख्या 1,387,791,814 होने का अनुमान है।

प्रदेश प्रवक्ता अरविन्द सिंह ने कहा की भारत की वर्तमान जनसंख्या 138 करोड़ है। इतने लोगों के साथ भारत दुनिया की दूसरी सबसे अधिक आबादी वाला देश है। जबकि चीन 1.44 बिलियन से अधिक लोगों के साथ शीर्ष पर है।  आंकड़े बताते हैं कि भारत दुनिया की लगभग 17.85% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। जिसका अर्थ है कि इस ग्रह पर छह लोगों में से एक भारत में रहता है।  हालांकि, दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश का ताज दशकों से चीन के सिर पर है, मगर भारत 2030 के अंत तक नंबर वन की स्थिति लेने के लिए तैयार है। 1.2% की जनसंख्या वृद्धि दर के साथ, भारत में 1.53 बिलियन से अधिक लोगों की आबादी होने का अनुमान है।  

भारत की वर्तमान जनसंख्या का ५०% से अधिक २५ वर्ष से कम और ६५% से अधिक ३५ वर्ष से कम आयु के हैं। लगभग ७२.२% जनसंख्या लगभग ६३८,००० गांवों में और शेष २७.८% लगभग ५,४८० कस्बों और शहरी समूहों में रहती है।  जन्म दर (प्रति 1,000 व्यक्ति प्रति वर्ष बच्चे का जन्म) 22.22 जन्म/1,000 जनसंख्या (2009 अनुमान) है जबकि मृत्यु दर (प्रति 1000 व्यक्ति प्रति वर्ष मृत्यु) 6.4 मृत्यु/1,000 जनसंख्या है।  प्रजनन दर 2.72 बच्चे / महिला (एनएफएचएस -3, 2008) और शिशु मृत्यु दर 30.15 मृत्यु / 1,000 जीवित जन्म (2009 अनुमानित) है।  भारत में दुनिया की सबसे बड़ी निरक्षर आबादी है।  2011 की जनगणना के अनुसार भारत की साक्षरता दर 74.04% है, जिसमें पुरुष साक्षरता दर 82.14% और महिला साक्षरता दर 65.46% है।केरल में सबसे अधिक साक्षरता दर ९३.९% है, लक्षद्वीप (९२.३%) दूसरे स्थान पर है और मिजोरम (९१.६%) तीसरे स्थान पर है।

देश की जमसंख्या को रेखांकित कर अरविंद कुमार सिंह ने कहा की हम जनसंख्या नियंत्रण के मोर्चे पर बहुत अधिक सफल नहीं हो पाये हैं और सही मायने में जनसंख्या विस्फोट ही इस देश के सारी समस्याओं का मूल है। खतरनाक गति से बढ़ती जनसंख्या हमारे संसाधन पर दबाव बनाती है और पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा जाती है। नतीजतन, सभी लोगों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के गरीब एवं वंचित लोगों तक मूलभूत सुविधाएं कारगर ढंग से पहुंचाने में सरकार के पसीने छूट जाते हैं।देश का संसाधन और धन को बचाने के लिए जनसंख्या नियंत्रणबहुत जरूरी है। हम आजादी के 70 साल बाद भी संघर्ष कर रहे हैं क्योंकि जनसंख्या बढ़ रही है और रॉकेट की गति से बढ़ रही है। कानून सभी के लिए एक होता है और प्रोत्साहन देता है फिर भी टीका से लेकर तीन तलाक के विषय में जिन लोगो को तुष्टिकरण दिखता है उनको उत्तर प्रदेश और असम सरकार के जनसंख्या नियंत्रण कदम में भी इसका दिखना स्वाभाविक है।

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