ADR की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: मतदाताओं की 3 प्रमुख अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी बिहार सरकार

ADR की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: मतदाताओं की 3 प्रमुख अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी बिहार सरकार

PATNA: चुनाव से ठीक पहले ADR की ये रिपोर्ट बिहार सरकार के कान खड़े कर सकती है. बहुत से नेता जो सीएम नीतीश के चेहरे के बल पर चुनाव लड़ना चाहते हैं उनकी दुर्गति भी हो सकती है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के सर्वेक्षण में बिहार सरकार को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. सर्वेक्षण में करीब 20 हजार मतदाताओं से सवाल किए गए. रिपोर्ट के अनुसार जो तथ्य सामने निकलकर आए हैं उसके मुताबिक बिहार सरकार ने मतदाताओं के प्राथमिकताओं की उपेक्षा की. या यूं कहें कि बिहार सरकार ने बेहद ही खराब काम किया है.

ADR की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में मतदाताओं की तीन मुख्य प्राथमिकताएं रोजगार के बेहतर अवसर, कृषि के लिए जल की उपलब्धता और बेहतर अस्पताल हैं. यदि इन तीनों प्रमुख प्राथमिकताओं पर गौर करें तो जो ADR ने रेटिंग जारी की है वो काफी निराशाजनक है. रोजगार के बेहतर अवसर को 5 में से 2.05 फीसदी, कृषि के लिए जल की उपलब्धता को 2.08 प्रतिशत, बेहतर अस्पताल को 2.10 प्रतिशत यानि औसत से भी कम रेटिंग मिली है.

आपकों बता दें कि सर्वेक्षण में मतदाताओं की सरकार से अपेक्षा को लेकर सवाल किए गए थे जैसे कि किसी प्रत्याशी को आप क्यों वोट देते हैं, अपराधिक प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने पर आपकी क्या राय है. चुनाव में अपराध और धन कितना मायने रखता है. और वोट देने के बाद सरकार अपने वादे को पूरा करती है या नहीं. जिसके जवाब में ADR रिपोर्ट की मानें तो मतदाताओं ने कहा कि किसी प्रत्याशी को वोट करने से पहले मतदाता चुनाव में सीएम प्रत्याशी का चेहरा, फिर पार्टी का नाम और आखिर में प्रत्याशी को रखकर वोट करती है. कुछ आकड़े तो बेहद चौंकाने वाले हैं जैसे कि 10 फीसद मतदाताओं के लिए नकद, शराब, उपहार चुनाव में किसी प्रत्याशी को वोट देने में महत्वपूर्ण कारक हैं. वहीं 16 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हे वोट देने के लिए प्रलोभन दिया जाता है. 98 फीसदी मतदाता तो यह चाहते हैं कि अपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशी नहीं होने चाहिए. लेकिन 37 फीसद मतदाताओं का कहना है कि हमें पता ही नहीं होता कि कौन प्रत्याशी आपराधिक छवि का है. 




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