बांग्लादेशी आतंकी का कैसे बना भारतीय पहचान पत्र, जांच में जुटी सुरक्षा एजेंसी....

बांग्लादेशी आतंकी का कैसे बना भारतीय पहचान पत्र,  जांच में जुटी सुरक्षा एजेंसी....

PATNA : सोमवार की शाम राजधानी पटना में दो बांग्लादेशी आतंकियों को गिरफ्तार किया गया। इन दोनों आतंकियों में एक के पास से भारत के नागरिक होने के कई पहचान पत्र मिले है। मिली जानकारी के अनुसार गिरफ्तार आतंकी खैरूल जो बांग्लादेश का मूल निवासी है। उसके पास से दो जगहों का वोटर आईडी, पैन कार्ड बरामद हुआ है। 

खैरूल बांग्लादेश का मूल निवासी है बावजूद इसके उसके पास से भारतीय पहचान पत्र बरामद हुए है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर खैरूल का भारतीय पहचान पत्र कैसे बना। आतंकी के पास देश का पहचान पत्र बरामद होने के बाद अब देश के अंदर बनने वाले पहचान पत्र को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। वहीं जांच एजेंसी भी सकते में है। 

आम नागरिकों को जहां अपना पहचान पत्र बनाने को लेकर खासी मशक्कत करनी पड़ती है ऐसे में एक विदेशी नागरिक और उसमें भी आतंकी का पहचान पत्र बन जाना वाकई में बड़ा सवाल है। 

बताया जा रहा है कि खैरूल का ननिहाल भारत-बांग्लादेश की सटे सीमा पर है। खैरूल का संबंध जिस आतंकवादी संगठन जेएमबी से होने की बात सामने आई है वह भारत-बांग्लादेश शरहद से इलाकों में अपना पांव पूरी तरह से पसार चुका है।  

बताया जा रहा है कि यह संगठन रोहंगिया मुसलमानों के एक बड़े समूह को पनाह देने का काम करता है। वहीं पिछले दिनों भारी तदाद में रोहंगिया मुसलमान पश्चिम बंगाल में शरणार्थी के रुप में आ गये थे। जिन्हें बाद कई राजनीतिक दलों के विरोध के बावजूद उन्हें वापस भेजा गया।  

पटना से गिरफ्तार दोनो आतंकी खैरुल और अबु सुल्तान भी  भारतीय शरहद में प्रवेश कर सबसे पहले कोलकाता और उसके बाद देश के कई महानगरों दिल्ली, मुम्बई, केरल के साथ-साथ कई बौद्ध धर्मस्थलों का भी दौरा कर पटना पहुंचे थे। जहां से एटीएस ने उन्हें दबोचा। 

बताया जा रहा है कि बांग्लादेश के शरहदी इलाके में आतंक का फार्म चलाने वाले आईएसबीडी तथा जेएमबी के आका नरुल होददा मासूम और खैरुल दोनों के बीच बिजनेस पार्टनरशिप होने की जानकारी जांच एजेंसियों को मिली है। 

एटीएस को शक है कि इस संगठन के कुछ और आतंकवादी बंगाल और बिहार में मौजूद हो सकते है। वहीं उनके पास भी भारतीय पहचान पत्र हो सकता है। जिसकी वजह से उनके पहचान में परेशानी हो सकती है। अब जांच एजेंसी इनके रैकेट के साथ-साथ इनके पहचान पत्र बनाने में मदद करने वालों के तलाश में भी जुटी है। 

कुंदन की रिपोर्ट 

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