आखिर कौन है वो पूर्व विधायक, जिनके पार्टी छोड़ने की घोषणा ने सीएम नीतीश को कर दिया बैचेन, जानिए यहां

आखिर कौन है वो पूर्व विधायक, जिनके पार्टी छोड़ने की घोषणा ने सीएम नीतीश को कर दिया बैचेन, जानिए यहां

PATNA : कुछ दिन पहले ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तीन माह के अंदर बिहार में सरकार बनाने का दावा किया था, जिसमें वह कितने कामयाब होंगे, यह वक्त की बात है। लेकिन उसस पहले ही उन्होंने सीएम नीतीश कुमार को बड़ा झटका दे दिया है। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार के करीबी और जदयू के पूर्व विधायक मंजीत सिंह राजद का दामन थाम सकते हैं। दो दिन पहले ही उन्होंने तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी। जिसके बाद उन्होंने आगामी शनिवार को राजद में शामिल होने की घोषणा की थी। दिल्ली से पटना लौटते ही जैसे ही सीएम को ये जानकारी मिली नीतीश कुमार परेशान हो गए. सीएम नीतीश ने मंजीत को रोकने के लिए अपनी पूरी टीम उतार दी है.

 मंजित सिंह के राजद में शामिल होने की घोषणा को लेकर जदयू को बड़ा झटका माना जा रहा है। विशेषकर सीएम नीतीश कुमार के लिए यह बड़ा नुकसान माना जा रहा है। यही कारण है कि बुधवार को पटना लौटने के साथ ही उन्होंने सबसे पहलेमंजीत सिंह के करीबी नेताओं लेसी सिंह और जय कुमार सिंह को निर्देश दिया कि जल्दी से जल्दी मंजीत से मिलें और उन्हें किसी भी कीमत पर रोकें. 


मान मनौव्वल की कोशिशें तेज

नीतीश कुमार के निर्देश पर मंत्री लेसी सिंह रातों-रात गोपालगंज में बैकुंठपुर में मंजित सिंह के आवास पर पहुंच गईं. वहीं पूर्व मंत्री जय कुमार सिंह और JDU के वरिष्ठ नेता और मंजीत सिंह के रिश्तेदार राणा रणधीर सिंह भी गोपालगंज पहुंचे औरउन्हें नीतीश कुमार का संदेशदिया। यह बात भी कही जा रही है कि खुद सीएम नीतीश ने उनसे फोन पर बात की है, जिसके बाद वह जदयू में बने रहने को तैयार हो गए हैं।

चुनाव में टिकट कटने से नाराज

मंजीत सिंह की नाराजगी तभी से मानी जाती है जब 2020 के विधानसभा चुनाव में JDU का टिकट उन्हें नहीं मिला और गठबंधन की वजह से बैकुंठपुर की सीट भाजपा के खाते में चली गई. इस पर मिथिलेश तिवारी चुनाव लड़े लेकिन उन्हें हार मिली. टिकट नहीं मिलने पर वह खुद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे और लगभग 40000 वोट हासिल किए.मंजीत चुनाव तो हार गए लेकिन उनकी वजह से भाजपा उम्मीदवारजीत नहीं पाया.यह सीटराजद के खाते में चली गई. यह सीएम से उनका करीबी रिश्ता ही था कि इसके बाद भी उनके खिलाफ जदयू किसी प्रकार की कार्रवाई की जगह विधान परिषद में भेजने का भरोसा दिया गया। 

विरासत में मिली राजनीति
 मंजीत सिंह की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है. उनके पिता की गोपालगंज की सियासत में अच्छी पकड़ थी और वो भी नीतीश कुमार के बेहद खास माने जाते थे. मंजीत सिंह भी अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे थे और अपने पिता की विधानसभा सीट बैकुंठपुर से विधायक भी बने.

 

 

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