आखिर क्यों पटना में रहते हुए भी लालू को रिसीव करने नहीं पहुंचे तेज-तेजस्वी, राजनीतिक इलाकों में हो रही है चर्चा

आखिर क्यों पटना में रहते हुए भी लालू को रिसीव करने नहीं पहुंचे तेज-तेजस्वी, राजनीतिक इलाकों में हो रही है चर्चा

PATNA : बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार में सबकुछ सही नहीं है, यह बात जगजाहिर हो चुका है। इस बात का बड़ा उदाहरण बीते सोमवार को एक बार फिर नजर आया, जब लालू प्रसाद पटना आते हैं, लेकिन उन्हें रिसीव करने के लिए न तो उनके राजनीतिक वारिस तेजस्वी यादव पहुंचते हैं और न ही पिता का दूध से पैर धोनेवाले तेज प्रताप यादव। दोनों बेटों का इस तरह से बर्ताव कई तरह की चर्चा को जन्म दे रहा है।

तेज प्रताप को सच में नहीं थी जानकारी

सोमवार को पटना आने के बाद लालू प्रसाद सीधे तेज प्रताप के घर गए, जहां तेज प्रताप नहीं मिले, जिसके बाद लालू वापस लौट गए। इसके कुछ समय बाद तेज प्रताप लालू से मिलने राबड़ी आवास पहुंच गए। उन्होंने बताया कि वह जिम गए हुए थे इसलिए देर हो गई। अब सवाल यह है कि जिस पिताजी से मिलने के लिए तेज प्रताप कुछ दिन पहले धरने पर बैठ गए थे, उनके पैर दूध से धोए थे। उन्हें रिसीव करने के लिए वह एयरपोर्ट पर नजर नहीं आए। जब पटना के सभी मीडिया को इस बात की जानकारी थी कि लालू प्रसाद की फ्लाइट कब आनेवाली है। यहां तक कि राजद के विधायकों को जानकारी थी तो यह संभव नहीं है कि तेज प्रताप को इसकी जानकारी नहीं रही होगी। अब तेज प्रताप ने किन कारणों से ऐसा किया, इस पर चर्चा होने लगी है। 

क्या तेजस्वी हैं नाराज

सबसे चौंकानेवाली बात तेजस्वी यादव को लेकर है। तेजस्वी यादव लालू प्रसाद के राजनीतिक वारिस माने जाते हैं। एक माह पहले लालू प्रसाद जब पटना आए थे, तो वह खुद उन्हें रिसीव करने के लिए गए थे। लेकिन इस बार पटना में होने के बाद तेजस्वी यादव उन्हें लेने के लिए नहीं गए। वहीं लालू प्रसाद भी सीधे घर जाने की जगह तेज प्रताप से मिलने के लिए पहुंच गए। यह बात कहीं न कहीं इस बात की तरफ इशारा कर रहा है कि हाल के दिनों में राजद में जिस प्रकार की उठापटक हुई है, उसको लेकर पिता-पुत्र में कुछ सही नहीं है। 

उप चुनाव के परिणाम में छिपी है सारी कहानी

हाल में बिहार विधानसभा के दो सीटों पर हुए उपचुनाव में जो परिणाम सामने आया है, उससे राजद को बड़ा झटका लगा है। वोटिंग से पहले यह तय माना जा रहा था कि तेजस्वी दोनों सीट पर जीत हासिल कर लेंगे। रुझान भी इस ओर इशारा कर रहा था। फिर लालू प्रसाद पटना आए और दोनों सीट पर चुनाव प्रचार करने के लिए गए। जिसे एनडीए ने एक बार फिर से जंगलराज के रूप में प्रचारित किया। नतीजा लोगों का समर्थन एक बार फिर से राजद से टूट गया। दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। 

छवि से बाहर निकलने की कोशिश में तेजस्वी

पिछले विधानसभा चुनाव में तेजस्वी ने अकेले ही चुनाव प्रचार किया था। उन्होंने खुद को लालू की छवि से अलग बिहार में विकास और रोजगार को मुद्दा बनाया था। लालू की खराब छवि से बाहर निकलने का फायदा तेजस्वी को मिला। लेकिन उपचुनाव में फिर से लालू की इंट्री हो गई। जिसका नुकसान हुआ। अब माना जा रहा है कि तेजस्वी खुद को अपने पिता की छवि से बाहर निकालने की कोशिश में हैं। जो तभी संभव है, जब वह पिता के रास्ते से अलग अपना रास्ता बनाएं। कल की घटना इस दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।

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