अपनों ने ही डूबो दी कुमार आशीष की नैया, राष्ट्रीय सचिव बनाए जाने के बाद प्रदेश इकाई ने आला कमान को भेज दी पूरी कुंडली

अपनों ने ही डूबो दी कुमार आशीष की नैया, राष्ट्रीय सचिव बनाए जाने के बाद प्रदेश इकाई ने आला कमान को भेज दी पूरी कुंडली

PATNA : बिहार कांग्रेस के नेता कुमार आशीष को पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बनाने मे प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने सिफारिश नहीं की थी।न तो केंद्रीय नेतृत्व ने इस संबंध में किसी तरह की जानकारी नहीं मांगी थी। बिना प्रदेश नेतृत्व से राय लिए हीं  उन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाकर  प्रियंका गांधी के साथ अटैच किया गया था।

बिहार कांग्रेस से नहीं ली गई थी राय

बिहार कांग्रेस अध्यक्ष मदनमोहन झा ने स्वीकार किया है कि कुमार आशीष के संबंध मे केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से मुझसे कोई जानकारी नहीं मांगी गई थी। हालांकि उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष ऐसी कोई बाध्यता नहीं है कि हर हाल मे प्रदेश नेतृत्व से राय ली हीं जाए। मदन मोहन झा ने कहा कि कई मामलों में राय ली भी जाती है तो कई मामलों में राय लेने की नौबत नहीं आती। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कुमार आशीष कांग्रेस के नेता हैं। उनका दिल्ली में भी कई नेताओं से संबंध है, हो सकता है कि इसी का उन्हें फायदा मिला होगा।

बधाई के तुरंत बाद कुमार आशीष की हो गयी थी विदाई

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने 19 फरवरी को कुमार आशीष को राष्ट्रीय सचिव बनाकर प्रियंका गांधी के साथ अटैच किया था। अभी कुमार आशीष को बधाई देने का सिलसिला ही चल रहा था, इसी बीच खबर आई कि कांग्रेस नेतृत्व ने उनकी छुट्टी कर दी है।

दरअसल पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष व वर्तमान जदयू नेता अशोक चौधरी द्वारा कुमार आशीष को अपराधी प्रवृत्ति का और दागी बताया था। मीडिया मे यह मामला सामने आने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें पद से हटा दिया था। राहुल गांधी ने 24 घंटे में ही अपना निर्णय बदलते हुए तत्काल प्रभाव से कुमार आशीष को हटाते हुए उनकी जगह सचिन नाइक को राष्ट्रीय सचिव बना पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी को सहयोग करने को कह दिया।

अपनों ने ही भेज दी कुंडली

जानकारों का कहना है कि भले हीं अशोक चौधरी सामने आकर कुमार आशीष की पोल खोले हों, लेकिन हकीकत कुछ और हीं है। पार्टी के सूत्र बताते हैं कि जैसे हीं उन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाने की खबर सामने आई पार्टी के कुछ नेता सक्रिय हो गए। इसके बाद कुमार आशीष की पूरी कुंडली केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा दी गई। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने बिना देरी किए उनरकी छुट्टी कर दी।

विवेकानंद की रिपोर्ट

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