हिमाचल और कर्नाटक में मिली हार के बाद पार्टी अध्यक्ष और महासचिव पर उठी अंगूली, बिहार के इस भाजपा नेता ने बताया दोनों को बताया अहंकारी

हिमाचल और कर्नाटक में मिली हार के बाद पार्टी अध्यक्ष और महासचिव पर उठी अंगूली, बिहार के इस भाजपा नेता ने बताया दोनों को बताया अहंकारी

PATNA : देश में तीन लोकसभा सीटों और 29 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव संपन्न हो चुके हैं। इनमे मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा का प्रदर्शन बेहतर रहा, लेकिन हिमाचल में भाजपा को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। यहां तीन विधानसभा व मंडी लोकसभा सीट भाजपा के हाथ से निकल गई। उसी तरह कर्नाटक में दो सीटों पर हुए उपचुनाव में एक सीट भाजपा को गंवानी पड़ गई। अब दोनों राज्यों में मिली हार को लेकर पार्टी में सिर फुटोव्वल शुरू हो गया है। 

इस सिर फुटोव्वल का कारण हैं दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार होना। इसके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का हिमाचल प्रदेश गृह राज्य होना, वहीं पार्टी के महासचिव बीएल संतोष का कर्नाटक गृह राज्य होना बताया जा रहा है। पार्टी के सबसे बड़े पद काबिज होने तथा  प्रदेश में सरकार होने के बाद भी यहां उपचुनाव में मिली हार पार्टी नेताओं को पचाना मुश्किल  हो रहा है। इनमें से ही एक हैं बिहार के पूर्व एमएलसी व भाजपा के वरिष्ठ नेता केके सिंह उर्फ कुमार बाबू। जिन्होंने दोनों नेताओं के काम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दोनों राज्यों में मिली हार के लिए  अहंकार को जिम्मेदार बताया है।


भाजपा के संस्थापक सदस्य कैलाशपति मिश्र की पुण्यतिथि के मौके पर कुमार बाबू ने कहा कि दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है. नड्डा पार्टी अध्यक्ष हैं, लेकिन अपने गृह राज्य में ही वह पार्टी को जीत दिलाने में कामयाब नहीं सके, वहां भाजपा सभी सीटों पर चुनाव हार गई। यह हार इसलिए मिली कि उन्होंने अपने अहंकार के कारण किसी की नहीं सुनी। उसी तरह कर्नाटक से बीजेपी के महासचिव बीएल संतोष आते हैं। वह अमित शाह के नजदीकी भी हैं। साथ ही प्रदेश में बीजेपी की सरकार है, लेकिन वह भी दोनों सीटों पर पार्टी की जीत सुनिश्चित नहीं करा सके। कुमार बाबू ने बीजेपी के आला अधिकारियों पर निशाना साधते हुए पूछा है कि दोनों राज्यों में खराब प्रदर्शन के लिए इन दोनों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी। 

बता दें हिमाचल में मंडी लोकसभा सीट सहित अरकी, फतेहपुर सीट व जुब्बल-कोथकाई सीट पर हार का सामना करना पड़ा है। इनमें जुब्बल कोथकाई की चर्चा सबसे अधिक हो रही है, जहां नड्डा ने पुराने प्रत्याशी को बदलकर अपने पसंद के प्रत्याशी को टिकट दिया था। नतीजा यह हुआ टिकट कटने से नाराज होकर चेतन बरागटा निर्दलीय चुनाव में उतरे। यहां भाजपा प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई और बरागटा दूसरे स्थान पर रहे। 


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