नीतीश-प्रधान मुलाकात के बाद हलचल बढ़ी, एक हजार से अधिक राजनैतिक कार्यकर्ताओं को सेट करने का 'मेगा' प्लान, नाम किया जा रहा शॉट लिस्ट

नीतीश-प्रधान मुलाकात के बाद हलचल बढ़ी, एक हजार से अधिक राजनैतिक कार्यकर्ताओं को सेट करने का 'मेगा' प्लान, नाम किया जा रहा शॉट लिस्ट

PATNA: बिहार के राजनीतिक गलियारे से बड़ी खबर है। सत्ताधारी गठबंधन जेडीयू-बीजेपी के एक हजार से अधिक राजनैतिक कार्यकर्ताओं को सेट करने को लेकर हलचल बढ़ गई है। भाजपा के कद्दावर नेता व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की सीएम नीतीश से मुलाकात के बाद दोनों दलों में गतिविधि बढ़ गई है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो मई अंत तक राज्य स्तर से लेकर जिला और प्रखंड लेवल तक हजार से अधिक राजनैतिक कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम कार्यान्वन समिति में जगह मिल सकती है। 

नीतीश-प्रधान मुलाकात के बाद हलचल बढ़ी

भाजपा के कद्दावर नेता धर्मेंद्र प्रधान 5 मई को पटना आये थे। वे खास मकसद ने सीएम नीतीश से मिलने पटना पहुंचे थे। मुख्यमंत्री आवास में नीतीश कुमार और धर्मेंद्र प्रधान की करीब 2 घंटे तक बातचीत हुई थी। बातचीत का एजेंडा सरकार के कामकाज के साथ-साथ राष्ट्रपति चुनाव था। हालांकि सीएम नीतीश ने कहा था कि उनसे पुराना संबंध रहा है। इसी वजह से वे मिलने पहुंचे थे। लेकिन अब जो बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है वो यह बिहार में बहुत जल्द जेडीयू-बीजेपी के कार्यकर्ताओं को सेट किया जा सकता है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद जेडीयू-बीजेपी में गतिविधि बढ़ गई है। अब जिला स्तर से नाम चयन कर प्रदेश में मंगाया जा रहा है। विश्वस्त सूत्रों से जो जानकारी मिली है वो यह कि इस महीने में यह काम हो जाना है। 

जेडीयू-बीजेपी कार्यकर्ताओं की आस होगी पूरी? 

बिहार में 2015 में महागठबंधन की सरकार बनी थी। 2017 में राजद से अलग होकर सीएम नीतीश ने बीजेपी के साथ एक बार फिर से हाथ मिलाया था। तब से दोनों दल के नेताओं की यह मांग रही है कि कार्यकर्ताओं को बीस-सूत्री,बोर्ड-निगम और आयोग में जगह मिले। लेकिन पांच सालों में ऐसा नहीं हुआ। भाजपा की तरफ से कई दफे मांग भी उठाई गई। लेकिन,कई राजनीतिक वजहों से यह संभव नहीं हो सका। इस वजह से राजनैतिक कार्यकर्ताओं में असंतोष भी पनपा। अब उस असंतोष को खत्म करने के लिए दोनों दलों के बीच बातचीत फाइनल हो गई है। जेडीयू-बीजेपी के विश्वस्त सूत्र बता रहे कि अब पूरी संभावना है कि प्रखंड लेवल से लेकर जिला लेवल और राज्य स्तर पर कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति गठित हो। बता दें, राज्य स्तर पर इस समिति के अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री होते हैं। वहीं एक या दो उपाध्यक्ष बनाये जाते हैं. राज्य स्तरीय कमिटी के उपाध्यक्ष को राज्य मंत्री का दर्जा होता है। वहीं जिला लेवल कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष प्रभारी मंत्री होते हैं। पिछली दफे जिला स्तरीय समिति में दो उपाध्यक्ष बनाये गये थे। एक बीजेपी से और दूसरा जेडीयू से।जिला स्तीरय समिति में 25 मेंबर होते हैं।  वहीं प्रखंड लेवल पर बनने वाली समिति में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी किसी राजनैतिक कार्यकर्ता को ही दी जाती है। इस तरह से हजार से अधिक कार्यकर्ताओं को सेट किया जा सकता है। 

बोर्ड-निगम-आयोग में सैकड़ों पद खाली

बता दें, बिहार में आयोग में अध्यक्ष और मेंबर होते हैं। कई आयोग लंबे समय से खाली है। वहां न तो अध्यक्ष है और न ही मेंबर । लिहाजा कामकाज भी बाधित हो रहा है। बिहार महिला आयोग इसका उदाहरण है जहां अध्यक्ष व सदस्य का कार्यकाल काफी पहले समाप्त हो गया लेकिन आज तक नई नियुक्ति नहीं हुई है।इसी तरह पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग,अनुसूचित जाति आयोग, महादलित आयोग, बाल श्रमिक आयोग,संस्कृत शिक्षा बोर्ड समेत कई अन्य आयोग है जो खाली है। कई बोर्ड-निगम ऐसे हैं जहां सरकार ने अध्यक्ष व सीईओ के पद पर प्रशासनिक अधिकारी की तैनाती कर रखी है। अध्यक्ष अगर आईएएस अफसर हैं तो सदस्य के तौर पर राजनैतिक कार्यकर्ताओं को जगह मिल सकती है। हालांकि जेडीयू और बीजेपी का नेतृत्व आधिकारिक तौर पर अभी इस बात की पुष्टि नहीं कर रहा। 






 

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