छपरा में लोगों का 15 करोड़ रुपया लेकर फरार हुआ एजेंट, निवेशकों की अटकी सांसे

छपरा में लोगों का 15 करोड़ रुपया लेकर फरार हुआ एजेंट, निवेशकों की अटकी सांसे

CHHAPRA : छपरा पोस्ट ऑफिस के एक एजेंट से जुड़े 500 से अधिक खाताधारक पिछले 3 दिनों से काफी टेंशन में है। इनके टेंशन का सबसे बड़ा कारण है की इनकी पसीने की गाढ़ी कमाई गबन कर लिया गया है। प्रतिदिन खाता में जमा करने के लिए राशि वसूलने वाला एजेंट अपने परिवार के साथ 3 दिनों से गायब है। खाताधारकों का कहना है कि एजेंट 15 करोड़ से अधिक राशि का गबन कर फरार हो चुका है। खाताधारक एजेंट के घर जा रहे हैं और सैकड़ों की संख्या में बिखरी पड़ी पासबुक में से अपना पासबुक चुनकर घर ले जा रहे हैं। फिर इसकी जांच डाकघर में जाकर करा रहे हैं। जांच के बाद जब उन्हें पता चलता है कि   उनके द्वारा खाते में जमा करने के लिए दिए गए लाखों रुपए जमा ही नहीं किया गया है तो उनकी सांसे थम जा रही है। 10 लाख से 50 लाख के बीच जिन खाताधारकों की राशि है। उनकी तो हार्टअटैक तक की नौबत आ चुकी है और कई बिस्तर पकड़ चुके हैं। लोग यह कहने से नहीं थक रहे हैं की एजेंट धीरज अग्रवाल छपरा का नीरव मोदी निकला जो पहले तो विश्वास जमाया फिर लोगों का करोड़ों रुपया लेकर फरार हो चुका है। 

गरीबों के आंसू छलके

जैसे ही एजेंट धीरज के फरार होने की खबर आग की तरह शहर में फैली। सबसे पहले गरीबों के आंसू छलक पड़े। क्योंकि उन्होंने पाई पाई करके अपने नौनिहालों की भविष्य संवारने के लिए रुपए इकट्ठा किए थे। कोई ₹100 तो कोई ₹200 प्रतिदिन मजदूरी करके जमा करता था। ऐसे में जिनकी मोटी रकम हो चुकी थी। उनकी तो सांसे ही उखड़ गई। वह रो रो कर अपनी व्यथा कहने लगे। हालांकि अभी कोई भी कैमरा पर नहीं आना चाह रहा है। धीरज के आने को लेकर आशान्वित है। 

पासबुक लेने की मची होड़

धीरज के फरार होने की खबर के बाद लोगों का हुजूम दौलतगंज स्थित उसके घर पर जुटने लगी है। धीरज के परिवार के अन्य सदस्यों ने धीरज के कमरे में रखे पासबुक व अन्य कागजात को सबके सामने रख दिया है। ताकि लोग अपना पासबुक ले सकें और कागजात देख सके।  जिसने भी पासबुक चेक कराया तो पता चला कि किसी का 6 माह से तो किसी का खाता खुलने के साथ ही रुपया ही नहीं जमा किया गया है। 

कई की हार्ट अटैक की नौबत तबीयत खराब 

एजेंट ने शहर के लगभग सभी वार्डों में अपने खाता धारक बना लिए थे।.ऐसे में कई खाताधारक ऐसे भी सामने आ रहे हैं। जिन्होंने 10 लाख से लेकर 50 लाख तक धीरज के माध्यम से या तो पोस्ट ऑफिस में जमा कराया है। या फिर सूद पर कर्ज  दिया है। ऐसे खाताधारकों की तो हार्ट अटैक की नौबत आ चुकी है कई बीमार पड़ गए हैं। 

सट्टा बाजार और लॉटरी में विशेष थी रुचि

एजेंट धीरज लॉटरी और सट्टेबाजी का बड़ा शौकीन था। लोगों का कहना है कि वह आम खाताधारको का रुपया सट्टेबाजी या लॉटरी में लगा चुका है। इसके अलावा जो रुपया बचा। वह लेकर फरार हो गया है। क्योंकि वह खाता खोलने के साथ ही निकासी फॉर्म पर भी लगे हाथ खाताधारक से हस्ताक्षर करा लेता था।

सूद का काम भी करता था एजेंट

कुछ खाता धारको ने बताया कि वह बड़े व्यापारियों से लाखों रुपए लेकर सूद पर चलाता था। किसी से 10 लाख तो किसी से 20 लाख रुपए कर्ज लिया है और उसे सूद पर चला दिया था। कई लोग तो उसकी रईसी और रंग मिजाजी की भी बात कह रहे हैं।

जांच एजेंसियों के डर से कई नहीं खोल रहे हैं मुंह

किस खाताधारक का कितना रुपया धीरज लेकर फरार हुआ है। यह कोई खाताधारक निश्चित रूप से नहीं बता रहा है। क्योंकि उन्हें पता है की बड़ी राशि को लेकर वित्तीय जांच एजेंसी छापेमारी कर सकती है और ऐसे बड़े लोगों को अपने रडार को ले सकती है। क्योंकि इतनी बड़ी राशि कहां से आई कैसे जमा कि यह भी जांच का मामला बनता है।

डाकघर की कार्यशैली पर उठे सवाल

जिन लोगों के पैसे धीरज लेकर फरार हुआ है। उन लोगों का यह भी कहना है कि जब एजेंट धीरज लंबे समय से खाताधारकों का रुपया जमा नहीं करता था तो पोस्ट ऑफिस ने क्यों नहीं इसकी जानकारी दी या फिर खाता ही सील कर दिया ? कम से कम पोस्ट ऑफिस को ऐसे एजेंटों पर नकेल कसनी चाहिए थी। ऐसे एजेंटों का लाइसेंस भी रद्द होना चाहिए। ऐसे मामलों में अधिकारियों को भी स्वत संज्ञान लेना चाहिए।

क्या कहते हैं थानाध्यक्ष

भगवान बाज़ार थानाध्यक्ष मुकेश कुमार झा ने कहा की अभी तक किसी ने कोई शिकायत नहीं की है और ना ही आवेदन दिया है। जैसे ही आवेदन आएगा त्वरित कार्रवाई होगी।

बचत पदाधिकारी भी कम जिम्मेवार नहीं 

एजेंटों की बहाली की जिम्मेवारी बचत पदाधिकारी की होती है। 3 साल पर उनके लाइसेंस का रिनुअल भी वही करते हैं। ऐसे में एजेंट पर जो भी कार्रवाई बनती है। वह उन्हें ही करना है। हालाँकि बचत पदाधिकारी ने कहा की पैसा लेकर भागने की सूचना हमें भी मिली है। इस मामले में एजेंट के खिलाफ कार्रवाई के लिए अनुशंसा की जाएगी।

छपरा से संजय भारद्वाज की रिपोर्ट 

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