केदार पांडेय को छोड़कर शिक्षा और शिक्षक के प्रति सभी MLC की नियत संदेहास्पद, CM नीतीश भी इस बात से हैं अवगत : सिपाही राय

केदार पांडेय को छोड़कर शिक्षा और शिक्षक के प्रति सभी MLC की नियत संदेहास्पद, CM नीतीश भी इस बात से हैं अवगत : सिपाही राय

PATNA : बीजेपी का एमएलसी हो चाहे जदयू का एमएलसी दोनों की नीयत शिक्षा और शिक्षक के प्रति बिल्कुल संदेहास्पद है। सीएम नीतीश कुमार भी जरूरत महसूस करते हैं तो वयोवृद्ध एमएलसी केदारनाथ पांडेय को बुलाकर सलाह मशविरा कर लिया करते हैं। यह कहना है बिहार प्रदेश इंटरमीडिएट वित्तरहित संघर्ष मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता सिपाही राय का है। 

उन्होंने कहा है कि सीएम नीतीश कुमार को भी जब शिक्षा या शिक्षको के लिए किसी बात पर राय लेनी होती है तो वे बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष केदार नाथ पांडेय को ही याद करते है। इससे यही निष्कर्ष निकलता है कि छह शिक्षक एमएलसी और छह स्नातक एमएलसी में दो कम्युनिस्ट एमएलसी और एक कांग्रेसी एमएलसी को छोड़कर शेष की अहमियत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने नगण्य है। एकमात्र बाबा केदारनाथ लड़े चाहे झगड़े पर सरकार इनको ही अहमियत देती है। तब तो जाहिर सी बात है कि सारण शिक्षक निर्वाचन सीट से जीतकर उनको चौथी पारी खेलनी पड़ेगी।  शिक्षक समुदाय तथाकथित सभी एमएलसी की मूल भावना से अवगत हैं।

सिपाही राय ने कहा है कि केदारनाथ पांडेय परिश्रम और संकल्प के बल पर सरकार के सभी एमएलसी से भिन्न विचार रखते हैं। उनका व्यक्तित्व भी असाधारण है। अनुदानित शिक्षक का मसीहा बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष की बातों से कहीं भी ऐसा नहीं लगता है कि वे वित्तरहित शिक्षक को छोड़कर चल रहे हैं। 

उन्होंने कहा है कि सरकार Covid -19 के कारण 2020 में विशेष सोचने नहीं जा रही है, क्योंकि अर्थ की कमी इसका मुख्य कारण है। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के निवर्तमान एमएलसी महोदय के अनुसार नीतीश सरकार कुछ करना भी चाहेगी तो यही हो सकता है कि नियोजित को सेवा शर्त मिल जाएगा और वित्तरहित को अनुदान मिल जाएगा।

साथियों 2015 के अनुदान से वंचित शिक्षकों को भी शीघ्र अनुदान निर्गत हो जाए इस बाबत पूछे जाने पर उनका कहना था कि इस दिशा में उनका प्रयास जारी है। 2016 के अनुदान के विषय में चर्चा किए जाने पर उन्होंने कहा कि वह अनुदान भी अवश्य निर्गत कराया जाएगा। जानकारी दी गई कि यदि 500 करोड़ रुपए आ गया रहता तो वित्तरहित को कम से कम दो अनुदान जरूर मिल गया रहता।

सिपाही राय ने कहा है कि मित्रों! संबद्धता वाली जांच के चक्कर में 615 अनुदानित संस्थान बिहार सरकार डाल दिया है। इसके बावजूद भी बिहार प्रदेश इंटरमीडिएट वित्तरहित संघर्ष मुक्ति मोर्चा अनुदानित शिक्षक और कर्मचारी के हित में  प्रयासरत है। सरकार की घोर अपेक्षा से आहत वित्तरहित कोटि के सभी शिक्षाकर्मी कामयाब होंगे।

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