JDU नेता ने दिया अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य, कहा भगवान भास्कर विश्व के सबसे बड़े चिकित्सक और बिहारी सबसे बड़े साधक व सेवक

JDU नेता ने दिया अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य, कहा भगवान भास्कर विश्व के सबसे बड़े चिकित्सक और बिहारी सबसे बड़े साधक व सेवक

PATNA : छठ कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। वैसे तो चार दिवसीय पर्व होता है, लेकिन अंतिम दो दिन विशेष महत्वपूर्ण होते हैं जब सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।  इस दिन भगवान सूर्य और छठी मैया (सूर्य भगवान की पत्नी ऊषा) की पूजा की जाती है। डूबते सूर्य को अर्घ्य, सूर्य की दूसरी पत्नी प्रत्युषा को दिया जाता है। लेकिन इसके साथ स्वास्थ्य पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ता है। उक्त बातें जदयू के वरिष्ठ नेता रितेश रंजन सिंह उर्फ बिट्टू सिंह ने डूबत सूर्य को अर्घ्य देने के बात कहा। उन्होंने कहा कि भगवान भास्कर विश्व के सबसे बड़े चिकित्सक और बिहारी सबसे बड़े साधक व सेवक हैं।

छठ पर्व की महत्व को बताते हुए जदयू के वरिष्ठ नेता रितेश रंजन सिंह उर्फ बिट्टू सिंह ने बताया कि छठ पर्व का जितना धार्मिक महत्व है, लगभग उतना ही प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। जदयू नेता ने बताया कि सूर्य की किरणें धरती पर जब पड़ती हैं तो वे किसी दवा से कम नहीं होतीं। उनमें शरीर से विषाक्तता निकालने की अद्भुद शक्ति होती है। सुबह और शाम कि किरणें जब सूर्य की हल्की होती हैं तो उनमें कई फायदेमंद चीजें शरीर को मिलती हैं। विटामिन डी मिलने से शरीर में जमा कैल्शियम एक्टिवेट हो जाता है। इससे शरीर न केवल ऊर्जावान बनता है बल्कि शरीर की हड्डियों में भी मजबूती आती है। सूर्य की किरणों के कारण हमारे शरीर पर अंदर या बाहर चिपके विषैले तत्व बाहर हो जाते हैं। 

उन्होंने बताया कि  छठ पूजा मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है। पूजा में कई रचनात्मक क्रियाएं होती हैं। पूजा पाठ, व्रत के दौरान सात्विक जीवन आदि सब कुछ मानिसक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। नकारात्मक ऊर्जा शरीर से दूर होती हैं और ईर्ष्या, क्रोध आदि से इंसान मुक्त होता है। सूर्य कि किरणें डिप्रेशन को हरने वाली होती हैं। नदी या घाट के किनारे सुबह और शाम का माहौल मानिसक सुख को बढ़ाने वाला होता है।


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