राष्ट्रीय अध्यक्ष की जीत के लिए वरिष्ठ की बलि, आडवाणी की परंपरागत सीट से अमित शाह लड़ेंगे चुनाव

राष्ट्रीय अध्यक्ष की जीत के लिए वरिष्ठ की बलि, आडवाणी की परंपरागत सीट से अमित शाह लड़ेंगे चुनाव

NEWS4NATION DESK : दो सांसदो से मुख्य विपक्षी पार्टी और फिर सत्ता तक भाजपा को पहुंचाने वाले बीजेपी के लौहपुरुष आज फिर एकबार चर्चा में हैं। आडवाणी पहली बार गुजरात के गांधीनगर की अपनी परंपरागत सीट से चुनाव नहीं लड़ रहे है। उन्हें गांधीनगर से इसबार टिकट नहीं मिला है। आडवाणी के इस परंपरागत सीट से इसबार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह चुनाव लड़ेंगे। 

भारतीय जनता पार्टी के दो सांसदों से मुख्य विपक्षी पार्टी बनने और फिर सत्ता पर काबिज होने का श्रेय अगर किसी को सबसे ज्यादा जाता है तो वह हैं राजनीति के लौहपुरुष लाल कृष्ण आडवाणी। भाजपा के उफान में उनका योगदान सबसे ज्यादा रहा है। 

1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के जरिए आडवाणी ने पूरे देश में भाजपा को एक अलग पहचान दिलाई थी। यहीं से भाजपा ने मजबूती से अपने कदम आगे बढ़ाने शुरू किए और फिर एक दिन वह कांग्रेस को चुनौती देने वाली प्रमुख पार्टी में तब्दील हो गई।


सातवीं बार लोकसभा में सक्रिय आडवाणई 6 बार गांधीनगर सीट से ही सांसद रहें है। राज्यसभा के बाद लोकसभा की ओर रुख करने पर उन्होंने पहली बार 1989 में नई दिल्ली से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल कर लोकसभा पहुंचे थे। उसके बाद से हर बार गांधीनगर से ही चुनाव लड़ते और जीतते आएं है। 

गुजरात का गांधीनगर सीट भाजपा का सबसे सुरक्षित सीट माना जाता है और शायद यहीं वजह है कि बीजेपी ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की जीत सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ आडवाणी की बलि चढ़ाते हुए  राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को इस सीट से लड़ाने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि आडवाणी की इस सीट से आठवीं बार चुनाव लड़ने की इच्छा थी।  लेकिन उनकी इच्छा के विरुद्ध उनके टिकट को काटकर अमित शाह को वहां से टिकट दिया गया है। 

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