नक्सलियों के अम्मा और उनके बच्चे, बिहार-झारखंड में मचा सकते है तबाही, जानिए कौन हैं ये अम्मा और उनके बच्चे

नक्सलियों के अम्मा और उनके बच्चे, बिहार-झारखंड में मचा सकते है तबाही, जानिए कौन हैं ये अम्मा और उनके बच्चे

NEWS4NATION DESK : पूर्णिया से गिरफ्तार सूरज नाम के तस्कर ने आर्म्स तस्करी के बड़े रैकेट का खुलासा किया है। बताया जा रहा है कि झारखंड पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में उसने बेहद चौंकाना वाला खुलासा करते हुए बताया है कि हथियार तस्करों ने बिहार और झारखंड में हथियार सप्लाई करने के लिए अपना कोड वर्ड बना रखा है। हथियार तस्कर जब आपस में फोन पर संपर्क करते हैं तो वे एके-47 को अम्मा बोलते हैं, जबकि गोलियों को उनके बच्चे। अगर हथियार तस्कर फोन पर यह कहते पाए गए कि अम्मा अपने बच्चों के साथ पटना जा रही है तो इसका मतलब यह हुआ कि दो से तीन एके-47 और कारतूस पटना की तरफ भेजा जा रहा है।

पूछताछ में हुआ खुलासा
 हथियार तस्करी के आरोप में गिरफ्तार सूरज से झारखंड पुलिस के कई अधिकारियों ने पूछताछ की है। सूरज ने पुलिस के पूछताछ में बताया है कि नागालैंड से म्यांमार बॉर्डर होते हुए मणिपुर के रास्ते से वे हथियार लाते हैं। नागालैंड से बर्मा जाने और हथियार लाने में तीन से चार दिन का समय लगता है। एक बार में तीन से चार विदेशी हथियार बड़े आराम से लेकर चले आते हैं।

नागा नेता है मुख्य सप्लायर
 सूरज ने खुलासा किया है कि एक नागा नेता के जरिए झारखंड में माओवादियों, टीपीसी और पीएलएफआई जैसे नक्सली संगठनों को इजरायल, जर्मन और अमेरिकन मेड हथियारों की खेप पहुंचाई जा रही है। उसने झारखंड पुलिस द्वारा पूछताछ में बताया है कि नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड का नेता आखान सांगथम झारखंड और बिहार में नक्सलियों तक विदेशी हथियार की तस्करी कराता है। आखान की पैठ नागालैंड में काफी अच्छी है। बही झारखंड-बिहार के कई हाई प्रोफाइल लोगों का आर्म्स लाइसेंस भी उसने नागालैंड से फर्जी कागजात के जरिए बनवाया है।

झारखंड-बिहार पहुंच चुका है हथियार
 सूरज की मानें तो आखान सांगथम नागालैंड के अलगाववादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल आफ नागालैंड का कप्तान है। दीमापुर में रहने वाले मुकेश और संतोष सांगथम के लिए काम किया करते थे। इन दोनों ने सूरज को हथियार की सप्लाई के लिए रखा था। दीमापुर से पटना तक हथियार पहुंचाने पर सूरज को एक हथियार के दस हजार रुपए मिलते थे। जनवरी और जून 2018 में नागालैंड नंबर के ट्रक और एक कार से चार एके-47, 5000 गोली और दूसरी बार केवल 5000 गोली मुकेश सिंह के दानापुर स्थित घर भेजी गई थी। तीसरी बार 5 फरवरी को एक के 47, पांच यूजीपीएल राइफल और 12 सौ से अधिक गोली लेकर सूरज दीमापुर से बिहार आ रहा था तब उसे बंगाल-बिहार सीमा पर डालकोटा चेक पोस्ट के पास से गिरफ्तार कर लिया गया था।

हवाला के जरिए भुगतान
 उसने खुलासा किया है कि मुकेश और संतोष दीमापुर के ही हांगकांग मार्केट में दुकान चलाने वाले राजू के जरिए पैसों का लेनदेन करते हैं। बिहार में हथियार की डिलीवरी के बाद पटना में पैसे हवाला के जरिए दिए जाते हैं। पैसे के लेनदेन का सारा काम आखान सांगथम की देखरेख में होता है।


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