आंदोलित किसान बोले, 'संसद में बैठे हमारे जनप्रतिनिधि किसी लायक नहीं, वो तो बिना पढ़े ही विधेयक पास करने के लिए हाथ खड़े कर देते हैं'

आंदोलित किसान बोले, 'संसद में बैठे हमारे जनप्रतिनिधि किसी लायक नहीं, वो तो बिना पढ़े ही विधेयक पास करने के लिए हाथ खड़े कर देते हैं'

डेस्क... दिल्ली-एनसीआर सीमा पर आंदोलन में भाग ले रहे किसानों ने कहा कि यह ठीक है कि हमने जन प्रतिनिधि चुनकर संसद में भेजे हैं, लेकिन हमारे जन प्रतिनिधि किसी लायक़ नहीं हैं। किसान विधेयक पढ़ने की उन्हें कहां फ़ुर्सत है। वो तो बस विधेयक पास कराने के लिए हाथ खड़े कर देते हैं। उनमें विधेयक का विरोध करने की हिम्मत कहां थी? उन्होंने यह भी नहीं सोचा कि इन्हीं किसानों ने यहां भेजा है, आगे क्या हाल करेंगे?"

कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ हरियाणा-राजस्थान सीमा पर पिछले तीन दिन से बड़ी संख्या में किसान जुट रहे हैं और दिल्ली आने की कोशिश कर रहे हैं। इन दोनों राज्यों के किसानों के अलावा सोमवार को यहां गुजरात के किसान भी पहुंचने लगे जिसकी वजह से इस सीमा पर प्रदर्शनकारी किसानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ये सभी किसान जयपुर-दिल्ली राजमार्ग पर अलवर ज़िले के शाहजहांपुर में धरने पर बैठे हैं। सोमवार को गुजरात के किसानों के एक जत्थे को आने से रोका गया और किसी तरह वे लोग यहां तक पहुंचे हैं। 

किसान केंद्र सरकार और अपने जन प्रतिनिधियों को लेकर बेहद ग़ुस्से में थे, कहने लगे, खेती-किसानी से जुड़े किसी एक भी आदमी से यदि सरकार ने यह क़ानून बनाने में सलाह ली होती तो ऐसे क़ानून की सलाह वह कभी नहीं देता। किसानों की मानें तो यह क़ानून तो हमारे समेत देश के सभी किसानों को भूमिहीन बना देगा। हमारी ज़मीनें उद्योगपतियों को सौंप दी जाएंगी।

हालाकि लंबे समय से बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिरोमणी अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर ने हिम्मत दिखाई और  कृषि कानून के तीनो अध्यादेशों के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने बिल का विरोध करते हुए मंत्री पद से इस्तीफा तक दे दिया। जो दल विरोध कर रहे हैं या फिर पक्ष में बोल रहे हैं उन्होंने शायद बिल पढ़ा ही नहीं होगा। 


कानून खत्म किए बिना नहीं लौटेंगे

राजस्थान का किसान देर से भले ही जगता है, लेकिन जगने पर वो फ़ैसला करके मानता है। हम सरकार को क़ानून वापस लेने पर विवश कर देंगे। वहीं राजस्थान के किसानों ने यह कोशिश पिछले हफ़्ते ही शुरू की है। नागौर से ही आए एक बुज़ुर्ग किसान ने कहा कि हमारे यहां अभी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव चल रहे थे। सभी लोग उसमें व्यस्त थे। उसके बाद किसान सड़क पर उतर रहा है। महिलाएं भी साथ हैं। अभी तो आंदोलन की शुरुआत है, क़ानून ख़त्म कराए बिना हम वापस नहीं लौटेंगे।

ड्रोन के जरिए पुलिस रख रही है नजर

आज सुबह से ही जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसानों के छोटे-छोटे समूह गाड़ियों और ट्रैक्टरों से शाहजहांपुर की तरफ़ जाते नज़र आए। दोपहर बारह बजे तक पुलिस और सुरक्षा बल इधर-उधर तैनात थे लेकिन उसके बाद अचानक सुरक्षा बलों की तैनाती काफ़ी बढ़ा दी गई और उन्हें अलर्ट कर दिया गया। पुलिस ड्रोन के ज़रिए भी आंदोलन की गतिविधियों पर नज़र रखने लगी लेकिन कुछ घंटों के बाद ही पुलिस बल की तैनाती कम कर दी गई और पुलिसकर्मी इधर-उधर नज़र आने लगे। 

खुले आसमान में रात बिताने को मज़बूर


कृषि कानून के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसानों को ठंड में खाने-पीने की व्यवस्था करने के लिए अब कई संस्थाएं आगे आ रही हैं। कुछ संस्थाएं खाना-पीना के साथ-साथ बाहर से आने वाले किसानों के लिए मसाज की व्यवस्था भी कर रहे हैं।  आंदोलनकारियों के लिए खाने-पीने का इंतज़ाम कर रहे एक समूह में कुछ महिलाएं और लड़कियाें ने कहा कि रात में भीषण ठंड थी। हम लोग तंबुओं में थे। देर रात तक तो अलाव जलाए आग सेंकते रहे। उसके बाद कब नींद आ गई पता ही नहीं चला। कई लोग तो तंबुओं के बाहर भी सो रहे थे और कुछ धरनास्थल पर ही अलाव के आगे बैठे रहे। राजस्थान के अलवर के रहने वाले कुछ बुज़ुर्ग किसान तेज़ धूप में भी अलाव के आगे बैठे हाथ सेंक रहे थे। बोले, "रात की ठंडक को मार रहे हैं। खुले आसमान में ही रात गुज़ारी तो ठंड भी बहुत लगी। इसीलिए धूप में भी आग सेंकना पड़ रहा है।

पटना से मदन कुमार की रिपोर्ट



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