अंकिता सिंह मर्डर केस : आरोपी शाहरूख को बचाने में लगे डीएसपी खुद नप गए, लोगों के गुस्से के बाद राज्य को करनी पड़ी कार्रवाई

अंकिता सिंह मर्डर केस : आरोपी शाहरूख को बचाने में लगे डीएसपी खुद नप गए, लोगों के गुस्से के बाद राज्य को करनी पड़ी कार्रवाई

DUMKA : दुमका जिले में 12वीं की स्टूडेंट अंकिता सिंह को जलाकर मार डालने के मामले में लोगों के गुस्सा जाहिर करने के बाद राज्य सरकार ने हत्या की जांच कर रहे डीएसपी नूर मुस्तफा को हटा दिया है। इस संबंध में जिले के एसपी अंबर लकड़ा ने अब जांच का काम निरीक्षक स्तर के अधिकारी को सौंप दी है। 

झारखंड के दुमका में 12वीं की स्टूडेंट अंकिता सिंह को जलाकर मार डालने के मामले में जांच अधिकारी को हटा दिया गया है. दरअसल, एसडीपीओ नूर मुस्तफा पर आरोपी शाहरुख को बचाने का आरोप लगा था. इसके बाद दुमका के एसपी अंबर लकड़ा ने एसडीपीओ नूर मुस्तफा को हटाते हुए निरीक्षक स्तर के अधिकारी को जांच सौंपी है. वहीं इस केस की निगरानी की जिम्मेदारी एसपी स्तर के अधिकारी करेंगे। 

लगे थे केस को कमजोर के आरोप

खबरों के मुताबिक़ दुमका में अंकिता को जलाये जाने के मामले में वहां के डीएसपी नूर मुस्तफा ने शुरू से ही अभियुक्त शाहरुख हुसैन को बचाने का प्रयास किया, एफआईआर में नाबालिग की जगह बालिग लिखवा दिये जाने की बात खबरों में आ रही है। जिसके बाद सोशल मीडिया पर डीएसपी नूर मुस्तफा के प्रति लोगों में आक्रोश देखा जा रहा था और उन्हें जांच से हटाने की मांग की जा रही थी। 

पूर्व सीएम ने भी जताई थी आपत्ति

मामले में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा था, 'डीएसपी नूर मुस्तफा के खिलाफ दुमका समेत पूरे राज्य के लोगों में भारी आक्रोश है और उनके वहां रहते लोगों को न्याय की उम्मीद नहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, इससे पहले कि मामला और बिगड़े, इस षड्यंत्रकारी डीएसपी नूर मुस्तफ़ा पर एफआईआर दर्ज करा कर उसे जेल भिजवाइये.'

गौरतलब है कि झारखंड की राजधानी रांची से पौने दो सौ किलोमीटर दूर दुमका की रहने वाली अंकिता सिंह को जलाकर मार डाला गया था। आरोप है कि शाहरुख को अंकिता से एकतरफा प्यार हुआ था. अंकिता ने इनकार किया तो 23 अगस्त की सुबह चार बजे शाहरुख अपने दोस्त के साथ दुमका के जरूवाडीह मोहल्ले में पहुंचा। अंकिता सो रही थी। आरोप के मुताबिक, शाहरुख ने खिड़की से लड़की पर पेट्रोल फेंका और आग लगा दी. आग लगाकर आरोपी भाग गया। बेटी को पहले दुमका के अस्पताल में और उसके बाद रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया. लड़की पांच दिनों तक हिम्मत दिखाती रही, मगर आखिर में वो जिंदगी की जंग हार गई।

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