एक ओर पार्टी दूसरी ओर परिवार किसका दें साथ, धर्म संकट में फंसे नेता

एक ओर पार्टी दूसरी ओर परिवार किसका दें साथ, धर्म संकट में फंसे नेता

NEWS4NATION DESK : झारखंड में इसबार कई नेताओं के सामने भारी धर्म संकट पैदा हो गया है। एक ओर उनकी पार्टी है तो वहीं दूसरी ओर उनकी पार्टी के खिलाफ परिवार के सदस्य ही चुनाव मैदान में उतर गए है। अब नेताओं के सामने यह धर्म संकट पैदा हो गया है कि आखिर वे साथ दें तो किसका।

दरअसल झारखंड के तीन लोकसभा सीटों रांची, खुंटी और गोड्डा में बीजेपी और कांग्रेस नेता के सामने धर्मसंकट खड़ा हो गया है। एक तरफ परिवार के सदस्य चुनाव मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी का उम्मीदवार है। भाजपा और कांग्रेस नेता  पार्टी और परिवार के बीच समर्थन को लेकर द्वंद् में फंसे हैं। किसके साथ चलें, किसका प्रचार करें। 

राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। वह खूंटी से भाजपा के संभावित प्रत्याशियों में एक थे। प्रदेश भाजपा की तरफ से राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजी गई संभावित प्रत्याशियों की सूची में उनका नाम था। लेकिन केंद्रीय चुनाव समिति ने पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को प्रत्याशी घोषित कर दिया। नीलकंठ सिंह मुंडा के बड़े भाई कालीचरण मुंडा खूंटी से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। नीलकंठ मुंडा को पार्टी धर्म निभाना पड़ेगा। चुनाव क्षेत्र में अपने ही भाई का विरोध करते हुए जनता के सामने जाना होगा। हालांकि नीलकंठ सिंह मुंडा साफतौर पर पार्टी लाइन पर चलने की बात कही है।

रांची के वर्तमान सांसद रामटहल चौधऱी का इसबार भाजपा ने पत्ता साफ कर दिया है। बीजेपी ने उनकी जगह संजय सेठ को उम्मीदवार बनाया है। टिकट कटने के बाद रामटहल चौधरी ने बगावत करते हुए भाजपा से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने 16 अप्रैल को नामांकन भरने का निर्णय लिया है। रामटहल चौधरी के पुत्र रणधीर चौधरी भाजपा रांची ग्रामीण के अध्यक्ष हैं। उन्हें पार्टी के उम्मीदवार को अपने क्षेत्र में जिताने के लिए प्रचार-प्रसार का काम करना है। रणधीर चौधरी के सामने धर्मसंकट है कि वह पार्टी को चुनें या पिता को। हालांकि रणधीर चौधरी पार्टी का साथ देंगे या फिर अपने पिता का इसका पता नहीं चल पा रहा है। उन्होंने इस मामले को लेकर अपना पत्ता अभी नहीं खोला है। 

कुछ ऐसे ही हालात कांग्रेस पार्टी के अंदर भी बना हुआ है। गोड्डा लोकसभा सीट के लिए कांग्रेस नेता फुरकान अंसारी प्रबल दावेदार थे। उनके पुत्र इरफान अंसारी जामताड़ा से कांग्रेस विधायक हैं। गोड्डा सीट महागठबंधन के तहत झाविमो को मिली है। इससे पिता-पुत्र दोनों नाराज हैं। इस बीच फुरकान की बेटी ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। अगर वह चुनावी रण में उतरती हैं, तो इरफान के सामने पार्टी या परिवार का साथ देने का द्वंद् होगा। अगर झाविमो उम्मीदवार का साथ नहीं दिया तो पार्टी की नाराजगी झेलनी होगी। पार्टी का साथ दिया तो पारिवारिक नाराजगी से सामना होगा। हालांकि नीलकंठ सिंह मुंडा की तरह इरफान अंसारी ने पार्टी लाइन पर चलने की बात की है। 

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