JDU प्रदेश कार्यालय पर हंगामा कराने की साजिश रच रहा 'विरोधी' गुट, विश्वस्त 'नेता' को दिया गया टास्क...एक-दो राउंड की हो चुकी बात

JDU प्रदेश कार्यालय पर हंगामा कराने की साजिश रच रहा 'विरोधी' गुट, विश्वस्त 'नेता' को दिया गया टास्क...एक-दो राउंड की हो चुकी बात

PATNA:  सीएम नीतीश कुमार ने इस बार कद्दावर नेता व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह का रास टिकट काट दिया है। रामचंद्र बाबू पिछले 12 सालों से राज्यसभा सदस्य हैं। इसके पहले वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रधान सचिव रह चुके हैं। जेडीयू के अंदर आरसीपी सिंह को नीतीश कुमार के बाद नंबर दो नेता माना जाता था। लेकिन 2021 में मोदी कैबिनेट में शामिल होने के बाद इनकी दूरी सीएम नीतीश से बढ़ते गई। स्थिति यहां तक आ पहुंची कि सीएम नीतीश ने आरसीपी सिंह को तीसरी दफे राज्यसभा भेजने से मना कर दिया। आरसीपी सिंह की जगह झारखंड के जमीनी नेता खीरू महतो को बिहार की राज्यसभा सीट से उम्मीदवार बना दिया। टिकट काटे जाने के बाद अब केंद्रीय मंत्री का पद भी जाना करीब-करीब तय है। इधर, टिकट काटे जाने से आरसीपी सिंह के समर्थक अंदर ही अंदर खासे नाराज हैं। लेकिन करें भी तो क्या....। एक खबर यह निकलकर सामने आ रही है कि आरसीपी गुट जेडीयू कार्यालय पर हंगामा कराने की फिराक में है।

विरोधी गुट का प्लानिंग

रास के टिकट से पत्ता साफ होने के बाद आरसीपी सिंह के समर्थक खासे नाराज हैं। हालांकि इनलोगों ने गुस्से का सार्वजनिक तौर पर इजहार नहीं किया है, लेकिन अंदर ही अंदर आग सुलग रही है। जो जानकारी आ रही है उसके अनुसार जेडीयू प्रदेश कार्यालय पर आने वाले दिनों में असमाजिक तत्व हंगामा या उपद्रव कर सकते हैं। इसकी पूरी प्लानिंग तैयार हो रही है।इसको लेकर एक राउंड की बात हो चुकी है। हंगामा कराने को लेकर पटना के ग्रामीण इलाके के एक मुखिया को आदमी इकट्ठा करने का टास्क दिया गया है। जानकार बता रहे हैं कि पुनपुन इलाके के एक शख्स को इसकी पूरी जिम्मेदारी दी गई है।विरोधी गुट के कुछ सदस्य इसके लिए बजाप्ता षडयंत्र रच रहे हैं। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि विरोधी गुट इसकी पूरी तैयारी कर रहा है। यह गुट अचानक प्रदेश कार्यालय पहुंचकर हंगामा मचा सकता है। निशाने पर प्रदेश अध्यक्ष हो सकते हैं।

आरसीपी सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष की करी थी खिंचाई 

रास का टिकट काटे जाने के बाद आरसीपी सिंह ने सीएम नीतीश का आभार जताया था। वहीं ललन सिंह से किसी तरह का विरोध या असंतोष की बात को सिरे से खारिज कर दिया था। लेकिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की जमकर खिंचाई भी की थी। उन्होने प्रदेश में 33 प्रकोष्ठ की जगह 12-13 प्रकोष्ठ बनाने पर नाराजगी जताते हुए हुए कहा था कि प्रदेश अध्यक्ष को संगठन की मजबूती के लिए पहले के प्रकोष्ठों को फिर बहाल करना चाहिए। साथ ही बड़े प्रकोष्ठों में उत्तर बिहार व दिक्षण बिहार अलग करना चाहिए। उन्होंने ने दावा किया था कि उन्होंने जदयू को बूथ स्तर तक पहुंचाया और राज्य के सामाजिक ताना-बाना को देखते हुए पार्टी के 33 प्रकोष्ठ बनाए। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष पर उन्होंने इस बात के लिए नाराजगी जताई कि 33 प्रकोष्ठ को 12-13 पर लाकर सीमित कर दिया गया।  उन्होंने कहा की 33 से 53 करना चाहिए था न कि उन्हें कम करके 12-13 पर लाना था. बता दें, आरसीपी सिंह जब राष्ट्रीय अध्यक्ष थे तो प्रकोष्ठों की संख्या बढ़ाकर अपने चहेते नेताओं को उसमें जगह दी थी। अपने खास लोगों को विशेष मौका दिया था। लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी से हटने के बाद सभी प्रकोष्ठों को भंग कर नये सिरे से प्रकोष्ठ का गठन किया गया। लिहाजा जिन लोगों को आरसीपी सिंह ने सेट किया था वे सड़क पर आ गये। जो नेता प्रकोष्ठों से हटाये गये थे और जिन्हें बाद में जगह नहीं मिली वही लोग इन दिनों आरसीपी सिंह के साथ खड़े दिख रहे हैं। 



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