धारा 370 : जब सरदार पटेल ने कहा था कि जवाहरलाल नेहरू रोएगा!

धारा 370 : जब सरदार पटेल ने कहा था कि जवाहरलाल नेहरू रोएगा!

NEWS4NATION DESK : अनुच्छेद 370 अब इतिहास बन चुका है 370 वोटों से जम्मू कश्मीर बांटने वाला बिल भी लोकसभा से पास हो गया है। मोदी सरकार के ही ऐतिहासिक कदम पर संसद की मुहर लगने से जम्मू कश्मीर और लद्दाख और 2 केंद्र शासित प्रदेश बन गए।

लेकिन 70 सालों से चले आ रहे इस नासूर ने जितने जख्म हिंदुस्तान और कश्मीर को दिए संभवत उसकी भरपाई करना मुश्किल होगा। हजारों सेना के जवान और 40हजार से ऊपर आम नागरिक मारे गए। लेकिन बड़ा सवाल यह है की धारा 370 को लागू कराने का जिम्मेदार था कौन ?

आर्टिकल 370 द अनटोल्ड स्टोरी किताब के मुताबिक जवाहरलाल नेहरू के जिद की वजह से संविधान में जोड़ा गया था। जब सरदार पटेल को इसे पारित कराने के लिए राजी किया गया तो पटेल ने कहा था आने वाले समय में जवाहरलाल नेहरु रोएगा।

सेवानिवृत्त मेजर जनरल बी शंकर ने अपनी किताब आर्टिकल  370 : द अनटोल्ड स्टोरी में धारा 370 के बारे में लिखा है कि कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनने में अगर सबसे ज्यादा बाधा डालने का काम किसी ने किया तो वह धारा 370 है।

धारा 370 देश की आजादी के बाद जवाहरलाल नेहरू और शेख अब्दुल्ला की तरफ से लाया गया था। नेहरू ने कश्मीर मसले को जानबूझकर अपने अंतर्गत रखा और गृह मंत्री होने के बाद भी सरदार पटेल को इस मसले पर काम नहीं करने दिया। सरदार पटेल ने जब आपत्ति जताई तो नेहरू ने इसका विरोध किया।

गौरतलब है की धारा 370 का सबसे गलत प्रावधान था कि इसमें कोई भी संशोधन केवल जम्मू कश्मीर विधानसभा ही कर सकती है। इस मसले पर नेहरू यह भरोसा दिलाते रहे कि यह एक अस्थाई प्रावधान है जो समय के साथ समाप्त हो जाएगा।

लेकिन हुआ इसके विपरीत। जम्मू कश्मीर विधानसभा में सबसे पहला काम किया गया कि महाराजा हरि सिंह के उत्तराधिकार के अधिकार को ही खत्म कर दिया गया। शेख अब्दुल्ला ने स्वयं को सदर रियासत घोषित कर दिया ।

बता दें कि जम्मू कश्मीर विधानसभा के द्वारा भारत में विलय का प्रस्ताव 1956 में पास किया गया था। शेख अब्दुल्ला और जवाहरलाल नेहरू के चलते धारा 370 लागू किया गया।

हालांकि बाद में महाराज हरि सिंह के साथ काम करने वाले गोपाल स्वामी आयंगर को नेहरू ने बगैर मंत्रालय के मंत्री बना दिया। उसकी वजह बताते हुए कहा कि अय्यंगर को कश्मीर पर काफी अनुभव है, लेकिन सरदार ने इस पर अपना विरोध जारी रखा। बेशक सिर्फ एक राज्य पर भारत के गृह मंत्री को नेहरु काम  नहीं करने देने पर अड़े थे।

अब जरा जवाहर लाल नेहरू के द्वारा 27 दिसंबर 1947 को दिए गए बयान को पढ़िए और समझिए 

"मुझे पता नहीं कि इसमें राज्यों के मंत्रालय (सरदार का मंत्रालय) की भूमिका कहां से आ जाती है सिवाय इसके कि जो कदम उठाए जाएं उनसे उसे अवगत कराया जाए यह मेरी पहल पर हो रहा है और जो मसला मेरी जिम्मेदारी है उससे मैं खुद को अलग नहीं कर सकता। आयंगर को खासतौर पर कश्मीर के प्रसंग में मदद करने को कहा गया है। कश्मीर पर उनके अनुभव और वहां के बारे में उनकी गहन जानकारी के चलते उन्हें पूरी सामर्थ दी गई है।"

इस बयान से खिन्न भारत के गृहमंत्री सरदार पटेल ने इस्तीफा दे दिया। मामला ज्यादा गंभीर होने पर इसे सुलझाने का प्रयास किया।

बता दें कि उस दौरान वी शंकर सरदार पटेल के निजी सचिव थे, यही वजह है कि उस दौरान की सारी गतिविधियों पर इन्होंने  विस्तार से लिखा है। बी शंकर के दस्तावेजों के मुताबिक नेहरू ने पटेल को बगैर जानकारी दिए 370 का मसौदा तैयार करवाया था।

जब गोपाल स्वामी आयंगर के द्वारा इसे संविधान सभा के समक्ष रखा गया तो इसकी धज्जियां उड़ा दी गई।

नेहरू उस समय भारत से बाहर थे इस बात की जानकारी मिलते ही उन्होंने सरदार को फोन कर गुजारिश की, धारा 370 को किसी तरह पास करवा दें। 

अंततः पटेल ने जवाहर की जिद को मान लिया लेकिन उसी दौरान उन्होंने बड़ा बड़े ही भारी मन से कहा कि जवाहर लाल रोएगा।

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