एएसपी लिपि सिंह ने NTPC में किया जनसंवाद कार्यक्रम का आयोजन, मजदूरों की सुनी समस्याएं

एएसपी लिपि सिंह ने NTPC में किया जनसंवाद कार्यक्रम का आयोजन, मजदूरों की सुनी समस्याएं

MOKAMA : सहायक पुलिस अधीक्षक लिपि सिंह ने एनटीपीसी में जनसंवाद कार्यक्रम का आयोजन किया. इस मौके पर उपस्थित मजदूरों ने कहा कि इनसे हर महीने मजदूरी के पैसे से दो से चार हजार रुपए जबरन ले लिए जाते हैं. इसका विरोध करने पर इन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है. कई लोगों ने खुलकर लल्लू मुखिया, रणवीर यादव, विजय यादव सरीखे लोगों का नाम लेते हुए कहा कि ये लोग रंगदारी करते हैं और मजदूरों के मेहनताने से हर महीने 2 से चार हजार रुपए जबरन वसूली करते हैं. विरोध करने पर इनका गेट पास छीन लिया जाता है. 

मजदूरों ने कहा कि विभिन्न कंपनियों के ठेकेदार मजदूरों को जनता दरबार में आने से रोकते हैं. शिकायत मिलने के बाद सहायक पुलिस अधीक्षक लिपि सिंह थानेदारों और पूरी पुलिस फोर्स के साथ एनटीपीसी के अंदर गई और मजदूरों को जनता दरबार में आने के लिए प्रेरित किया. इसके बावजूद कई ठेकेदार और एनटीपीसी के स्थानीय अफसरों की ओर से मजदूरों को रोकने की शिकायतें मिली. जनता दरबार में मौजूद लोगों को डराने और प्रलोभन देने की शिकायतें मिलने के बाद एक ठेकेदार को हिरासत में भी लिया गया. 

इसके बाद बड़ी संख्या में फरियादी उमड़ पड़े. सभी मजदूरों की एक ही शिकायत थी कि यहां पर केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से तय मजदूरी के प्रावधानों का उल्लंघन किया जाता है. वाजिब मेहनताना भी नहीं दिया जाता है. इसके अलावा जो भी मजदूरी मिलती है उसमें से 2 से 4 हजार रुपए काट लिए जाते हैं. विरोध करने वाले लोगों को मारे पीटे जाने की शिकायतें भी मिली. कई लोगों के गेट पास भी जबरन छीन लिए गए. कई लोगों ने कई तरह की शिकायतें की. अधिकांश शिकायतें अवैध वसूली और रंगदारी से जुड़ी थी. जनता दरबार में यह बात भी सामने आई कि एनटीपीसी के कुछ अधिकारी और ठेकेदारों की मिलीभगत है जिसके कारण यहां विरोध करने वाले मजदूरों को या तो नौकरी से निकाला जाता है या फिर उन्हें डरा धमका कर खामोश कर दिया जाता है. 

सभी लोगों के आवेदनों को लिया गया है तथा उनके आवेदनों की सत्यता की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी. वहीं एसडीएम के जनता दरबार में कई लोगों ने शिकायत की कि जिनकी जमीन अधिग्रहित हुई थी उनको नौकरी से भी निकाल दिया गया. ऐसे प्रभावित लोगों से शुरुआती कुछ सालों तक काम कराया गया और इसके बाद इनको बिना वजह नौकरी से निकाल दिया गया है. जनता दरबार में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए थे. मोकामा, बाढ़, एनटीपीसी, पंडारक, समया गढ़ और अथमलगोला थानों की पुलिस के अलावा भारी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी. स्थानीय ठेकेदारों और रंगदारों के कारण मजदूर यहां आने से भी डर रहे थे लेकिन प्रशासन की ओर से सुरक्षा का आश्वासन दिए जाने और पुलिस बंदोबस्त के कारण बड़ी संख्या में फरियादी उमड़ पड़े.

पटना ग्रामीण से रवि शंकर शर्मा की रिपोर्ट

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