अस्पताल में 'बीमार' हालत में पड़ी रहती है 'एबुंलेंस', इसी पर लाए जाते हैं मरीज

अस्पताल में 'बीमार' हालत में पड़ी रहती है 'एबुंलेंस', इसी पर लाए जाते हैं मरीज

कैमूर। जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नुआंव में एंबुलेंस की व्यवस्था भगवान भरोसे है। कब एंबुलेंस बिगड़ जाएगी और कब सही रहेगा इसकी बात तो स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी भी नहीं बता पा रहे। साल 2012 में 102 के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नुआंव में बहाल हुई थी एम्बुलेन्स व्यवस्था। आठ साल में पांच लाख किलोमीटर यह गाड़ी चल चुकी है और अब पूरी तरह से जर्जर अवस्था में हो गई है। गाड़ी अक्सर बिगड़े हुए हालात में ही अस्पताल परिसर में खड़ा रहता है या यूं कहें कि अस्पताल की यह एबुंलेंस उस बीमार मरीज की तरह है, जिसका कोई इलाज नहीं है।  कई बार प्रभारी द्वारा जिले में होने वाले चिकित्सकों के बैठक में मामला संज्ञान में लाया गया बस आश्वासन ही उन्हें मिल रहा है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं और दुर्घटना के शिकार हुए मरीजों के साथ क्या होता होगा आप अंदाजा लगा सकते हैं। 

दरअसल यह मामला तब उजागर हुआ जब स्वास्थ्य व्यवस्था के बिगड़ते हालात को देखते हुए कैमूर डीएम के निर्देश पर कैमूर जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों की जांच कराई गई। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नुआंव का जांच करने के लिए एएसडीएम मोहनिया पहुंचे। जहां एंबुलेंस की कमी दिखाई दिया। वहां के लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि गाड़ी बहुत ही जर्जर अवस्था में है। अगर मरीज लेकर चली भी तो कब कहां जाकर रुक जाएगी इसका कोई पता नहीं। चिकित्सक जल्द इस एंबुलेंस को ले जाने की सलाह भी नहीं देते हैं। कैमूर और बक्सर जिले के बॉर्डर पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नुआंव में एंबुलेंस व्यवस्था नहीं रहने से गर्भवती महिलाओं और एक्सीडेंट में आए मरीजों के साथ खासा परेशानी का सामना उठाना पड़ता है। 


अस्पताल के जांच करने गए एएसडीएम संजीत कुमार बताते हैं जिलाधिकारी के निर्देश पर अस्पताल परिसर का जांच करने गए तो एंबुलेंस व्यवस्था बेहद ही खराब दिखा। जिसकी रिपोर्ट जिला में कर दी गई है । वहीं अस्पताल के प्रभारी बताते हैं 2012 में 102 के तहत व्यवस्था बहाल थी लेकिन आज वह पूरी तरह जर्जर अवस्था में है। अगर आज बनती है तो कल फिर बिगड़ जाता है। ऐसे में हम लोग मरीजों को रेफर करके छोड़ देते हैं। उन्हें अपने साधन चले जाना पड़ता है परिजनों को । वही आशा कार्यकर्ता बताती है गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने में परेशानी होती है। अगर कोई गंभीर हो तो एम्बुलेन्स के अभाव में दम भी तोड़ देती है।


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