नौ साल की उम्र में रिक्शा चलाने को मजबूर है मासूम, कहां है बोधगया की स्वंयसेवी और समाजसेवी संस्थाएं

नौ साल की उम्र में रिक्शा चलाने को मजबूर है मासूम, कहां है बोधगया की स्वंयसेवी और समाजसेवी संस्थाएं

GAYA : भारत सरकार और बिहार राज्य सरकार के अनेकों योजना ऐसे है जो गरीबो के हित मे कल्याणकारी साबित हो रहे है। लेकिन अफसोस इस बात की है कि आखिर उन योजनाओ का लाभ गरीबों तक क्यों नही पहुंचता जिन्हें इसकी शख्त जरूरत है। पेट जलने पर बच्चे अब रिक्शा खिंचने पर विवश हो गए है। मामला बोधगया के चिल्ड्रेन पार्क के पास की है जहां एक 9 वर्षीय बच्चा  रिक्शा चलाते हुए बाजार की तरफ जा रहा था। जिसपर एक भूटानी महिला बैठी थी  बोध गया में ऐसे कई बच्चे दिख जाएंगे, जो छोटी उम्र में रिक्शा चलाने को मजबूर हैं।

सिर्फ फोटी खिंचवानेवाली संस्थाएं

बोधगया में ऐसे कई देशी- विदेशी संस्थाए संचालित है जो कहते है कि हम गरीबों के हित के लिए कार्य करते हैं,समाज के सुधार के  लिए कार्य करते है लेकिन फिर भी समाज मे सुधार नही हो रहा। बल्कि यहां गरीबों की सहायता करते करते संस्था के संचालक खुद रसूखदार बन जाते हैं। ऐसे संस्थाओं के लोग सिर्फ गरीबो के मदद करने के नाम पर फोटो खिंचवाकर वाहवाही लूटने का काम करती है। लेकिन वास्तविक जरुरतमंदों को सहायता नहीं मिलती है। 

आखिर  सरकार की अनेकों योजना इन गरीब तक क्यों नहीं पहुंच पाता है।इतनी सारी योजनाओं का लाभ किसे मिल रहा है।  इनके हाथ में किताब के जगह रिक्शा क्यों हैया फिर कोरोना के वजह से हुए लॉकडाउन का ये गरीबों पर असर है।

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