बिक्रम में सियासत के तिकड़म के बीच बढ़ गयी भाजपा की धड़कन! अतुल के खिलाफ बागी बन अनिल ने ठोकी ताल

बिक्रम में सियासत के तिकड़म के बीच बढ़ गयी भाजपा की धड़कन! अतुल के खिलाफ बागी बन अनिल ने ठोकी ताल

patna : उम्मीदवारों की घोषणा से पहले न्यूज़4नेशन ने बिक्रम विधानसभा की खोज-ख़बर में  बताया था कि पिछले दो दशकों से भाजपा का गढ़ रही यह सीट अपनों के तिकड़म में ही 2015 में फंस गयी थी।वर्तमान स्थिति तब से भी ज्यादा बदतर हो गयी लगती है।

2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के तब के प्रत्याशी और तात्कालीन विधायक अनिल कुमार एक सीधी लड़ाई में कांग्रेस के उम्मीदवार सिद्धार्थ सिंह से 44 हजार से अधिक मतों से हार गए थे।ऐसा लगता है कि पार्टी ने पिछली हार का ठीकरा अनिल कुमार पर ही फोड़ा है।नतीजन, इसबार उनसे टिकट छीनकर युवा नेता अतुल कुमार को दिया है।

न्यूज़4नेशन ने बताया था कि बिक्रम विधानसभा से मुख्यरूप से कमल के चिन्ह के लिए पांच उम्मीदवार सिंबल के लिये जोर आजमाइश कर रहे थे।।पिछली बार पार्टी के उम्मीदवार रहे और तीन बार के विधायक अनिल कुमार, पूर्व विधायक रामजन्म शर्मा, पूर्व विधायिका उषा विद्यार्थी, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य योगेंद्र शर्मा और वर्तमान में पार्टी टिकट हासिल करने में सफल रहे युवामो र्चा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अतुल कुमार।


प्रत्याशी घोषणा पूर्व के अपने फील्ड रिपोर्ट में न्यूज़4नेशन ने अपने पाठकों को बताया था कि पार्टी के 2015 के उम्मीदवार अनिल कुमार के समर्थकों ने उनकी हार के लिए भितरघात को जिम्मेवार माना था। उसमें दल के ही कई लोगों का नाम सामने आया था।आज वर्तमान में अतुल कुमार पार्टी की ओर से मैदान में हैं । वहीं पूर्व विधायक अनिल कुमार ने बागी बनकर निर्दलीय लड़ने की घोषणा कर उनकी राह मुश्किल कर दी है।पार्टी के लिए चिंता की बात यह भी है कि अतुल कुमार के विरोध में कई मंडल अध्यक्षों और पार्टी के क्षेत्रीय पदाधिकारियों ने खुला विद्रोह कर अनिल कुमार का समर्थन किया है।उधर बिक्रम सीट से ही टिकटार्थी रही उषा विद्यार्थी द्वारा लोजपा का दामन थामकर बगल के पालीगंज सीट से चुनाव मैदान में कूद पड़ना भी पार्टी समर्थकों के लिए हताश करने वाला है। वहीं दूसरी तरफ पार्टी के प्रति पूरी तरह से समर्पित व युवाओं के बीच अच्छा पैठ रखने वाले योगेंद्र शर्मा और सबसे पुराने कार्यकर्ता व अभिभावक तुल्य माने जामे वाले रामजन्म शर्मा पार्टी अनुशासित सिपाही की तरह पार्टी की जीत के लिये लगे हुए हैं।इनलोगों ने आक्रोश तक जाहिर नहीं किया।

इधर, कांग्रेस पार्टी ने बिक्रम सीट से रिकॉर्ड मतों से जितने वाले वर्तमान विधायक सिद्दार्थ सिंह में अपना विश्वास कायम रखते हुए फिर से अपना उम्मीदवार बनाया है। अब देखना रोचक होगा कि विपक्षी योद्धा के साथ अपने ही पूर्व सेनापति की चुनौती से उपजी त्रिकोणीय लड़ाई में भारतीय जनता पार्टी अतुल कुमार के सहारे ,पार्टी का गढ़ कहे जाने वाले इस सीट के तिकड़म से किस तरह निपट पाती है ?

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